टेरीजा पर प्रधानमंत्री पद छोड़ने का दबाव, ब्रेक्जिट को निपटने के तरीके पर उठे सवाल

यूरोपीय यूनियन से अलगाव (ब्रेक्जिट) के मुद्दे पर लगातार असफलता का सामना कर रहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे को अब अपनी कुर्सी बचाना मुश्किल हो रहा है। विपक्षी और पार्टी सांसदों के असंतोष के बाद अब उनकी कैबिनेट के सदस्य भी ब्रेक्जिट से निपटने के उनके तरीके पर सवाल उठाने लगे हैं। इसके चलते टेरीजा पर इस्तीफे का दबाव बन गया है।

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ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार में शामिल कई मंत्री और सत्तारूढ़ दल कंजरवेटिव पार्टी के कई सांसद टेरीजा से इस्तीफे की सीधी मांग करने के लिए हाथ मिला रहे हैं। ब्रेक्जिट पर अगले हफ्ते होने वाले तीसरे मतदान में भी अगर सरकार के मसौदे को संसद की स्वीकृति नहीं मिली, तो सत्तारूढ़ दल के नेता ही टेरीजा के खिलाफ खड़े हो जाएंगे।
पूर्व में दो बार हुए मतदान में संसद ने सरकार के मसौदे को खारिज कर दिया था। कयास यहां तक लगाए जा रहे हैं कि उप प्रधानमंत्री डेविड लिडिंग्टन कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पदभार संभाल सकते हैं और ब्रेक्जिट की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस तरह की मीडिया रिपोर्टो को सिरे से खारिज किया है और लिडिंग्टन ने कहा है कि वह 100 प्रतिशत प्रधानमंत्री टेरीजा के साथ हैं।
टेरीजा समर्थक सांसदों के धड़े में शामिल चांसलर फिलिप हैमंड ने कहा, यह प्रधानमंत्री पद का मामला नहीं है। प्रधानमंत्री बदलने से काम नहीं चलेगा। सरकार चलाने वाली पार्टी बदलने से भी काम नहीं चलेगा। हैमंड ने ब्रेक्जिट पर दोबारा जनमत संग्रह की मांग पर विचार करने की बात कही है। शनिवार को करीब दस लाख लोगों ने लंदन की सड़कों पर मार्च कर ब्रेक्जिट पर दोबारा जनमत संग्रह की मांग की थी। ये लोग ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में बने रहने के समर्थक थे।

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