टीनएजर्स में घबराहट और बेचैनी बढ़ा रही हैं शुगरी ड्रिंक्स

टीनएज शारीरिक और मानसिक बदलावों का एक नाजुक दौर होता है। माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को मोटापे या डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचाने के लिए उनके खानपान पर नजर रखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनके हाथ में मौजूद कोल्ड ड्रिंक, मीठी कॉफी या एनर्जी ड्रिंक का कैन उनके मन और मस्तिष्क पर क्या असर डाल रहा है?
आजकल युवाओं में तनाव और चिंता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें अक्सर सिर्फ ‘उम्र का असर’ मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी बीच, एक नई रिसर्च सामने आई है जो बताती है कि शुगरी ड्रिंक्स का ज्यादा इनटेक टीनएजर्स में एंग्जायटी का खतरा 34% तक बढ़ा देता है।
क्या कहते हैं WHO के आंकड़े?
दुनिया भर में युवाओं के बीच मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक:
दुनिया भर में 10 से 19 साल के हर 7 में से 1 (14.3%) किशोर को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई न कोई समस्या है।
दुर्भाग्य से, अक्सर इन समस्याओं को पहचाना नहीं जाता और इनका इलाज भी नहीं हो पाता है।
डिप्रेशन, एंग्जायटी और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं किशोरों में बीमारी और विकलांगता का एक प्रमुख कारण हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 15 से 29 वर्ष के युवाओं में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण सुसाइड है।
क्या कहती है नई रिसर्च?
बोर्नमाउथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा की गई यह नई स्टडी ‘जर्नल ऑफ ह्यूमन न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स’ में पब्लिश हुई है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पुराने कई अध्ययनों के डेटा और सर्वे का विश्लेषण किया, जिसमें किशोरों के खानपान और उनके मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों को मापा गया था। बता दें, स्टडी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नतीजा यह था कि शुगरी ड्रिंक्स का इनटेक करने वाले टीनएजर्स में एंग्जायटी का खतरा 34% तक बढ़ गया।
स्टडी में शामिल की गई शुगरी ड्रिंक्स
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने उन ड्रिंक्स को शामिल किया था जिनमें न्यूट्रिशन कम और कैलोरी ज्यादा होती है, जैसे:
फिजी सोडा
एनर्जी ड्रिंक्स
मीठे फलों के जूस और शेक्स
मीठी चाय और कॉफी
फ्लेवर्ड मिल्क
फिजिकल ही नहीं, मेंटल हेल्थ पर भी है खतरा
इस स्टडी की सह-लेखिका और न्यूट्रिशन की लेक्चरर डॉ. क्लो केसी का कहना है कि आज तक ज्यादातर हेल्थ कैंपेन में खराब खानपान को सिर्फ शारीरिक बीमारियों (जैसे मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज) से जोड़कर देखा गया है। ऐसी ड्रिंक्स, जो एनर्जी से तो भरपूर होती हैं, लेकिन जिनमें पोषक तत्वों की कमी होती है, उनके मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव को हमेशा नजरअंदाज किया गया है।
शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि शुगरी ड्रिंक्स पीने और एंग्जायटी के लक्षणों के बीच एक लगातार संबंध देखा गया है। हालांकि, चूंकि यह पुराने अध्ययनों पर आधारित एक रिव्यू है, इसलिए यह पूरी तरह से साबित नहीं करता कि शुगरी ड्रिंक्स ही सीधे तौर पर एंग्जायटी पैदा करती हैं।
फिर भी, डॉ. केसी के अनुसार, यह अध्ययन हाई शुगर ड्रिंक्स और युवाओं में एंग्जायटी डिसऑर्डर के बीच एक ‘अनहेल्दी कनेक्शन’ की पहचान जरूर करता है। चूंकि, हाल के वर्षों में टीनएजर्स में एंग्जायटी के मामले तेजी से बढ़े हैं, इसलिए खानपान से जुड़ी उन आदतों को पहचानना और बदलना बहुत जरूरी है, ताकि इस बढ़ते खतरे को रोका जा सके।





