झारखंड : उपचुनाव बताएगा कौन सबसे अधिक ताकतवर, तीन दिग्‍गज नेताओं में होगी टक्कर

चंदन मिश्र

रांची। झारखंड में विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बिहार विधानसभा के चुनाव के साथ-साथ यहां की दो सीटों पर संभावित उपचुनाव सियासी उलट-फेर का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। उपचुनाव सूबे के कम से कम तीन बड़े नेताओं की ताकत तय करेगा। चार नेताओं में किनकी नाक ऊंची है, उपचुनाव यह भी तय कर देगा। इन नेताओं में सबसे ऊपर हैं सूबे के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन। सूबे के वित्त मंत्री और कांग्रेस के अध्यक्ष रामेश्वर उरांव दूसरे बड़े नेता होंगे। भाजपा विधायक दल के नेता सह सूबे के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तीसरे बड़े नेता होंगे।

2019 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने संतालपरगना की दो सीटों दुमका और बरहेट से चुनाव जीतकर अपना दबदबा कायम किया था। बरहेट विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद उन्होंने दुमका सीट से बाद इस्तीफा दे दिया है। दूसरी खाली सीट बोकारो के निकट बेरमो की है, जहां से कांग्रेस के पूर्व मंत्री और इंटक के राष्ट्रीय नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह के 24 मई को हुए निधन के बाद से खाली हुई है। राजेंद्र प्रसाद सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे और चार दशक से राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के मजदूर संगठन से जुड़े रहे।

दुमका : हेमंत सोरेन बनाम बाबूलाल मरांडी

दुमका झारखंड की उपराजधानी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरे संतालपरगना को अपना सियासी गढ़ मानता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यहां से सर्वाधिक सीटें जीतकर इस बार सूबे में सरकार बनाई है। शिबू सोरेन दुमका से सात बार सांसद चुने गए हैं। लिहाजा दुमका विधानसभा की सीट सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रतिष्ठा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की साख से जुड़ी है। हेमंत सोरेन ने 2019 में यहां से भाजपा सरकार की मंत्री रहीं प्रोफेसर लोईस मरांडी को हराकर जीत हासिल की थी। झाविमो छोड़ 14 साल बाद भाजपा में शामिल होनेवाले भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के लिए भी दुमका समेत संतालपरगना लंबे समय से सियासी अखाड़ा रहा है।

दुमका संसदीय क्षेत्र से वह 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में शिबू सोरेन तथा उनकी पत्नी रूपी सोरेन को हराने का रिकार्ड बना चुके हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद दुमका उपचुनाव उनके लिए लिटमस टेस्ट साबित होगा। बाबूलाल मरांडी का दुमका के मतदाताओं पर कितना असर है, इसके साथ-साथ भाजपा के भावी प्रदेश नेतृत्व की पहली जांच परीक्षा में उनकी क्षमता भी परखी जाएगी। लिहाजा हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी के लिए दुमका की सीट की हार-जीत उनके दलीय नेतृत्व को कसौटी पर कसेगी। दोनों नेता संताली हैं और दोनों का सियासी अखाड़ा संतालपरगना है। यह बात अलहदा है कि दोनों नेता झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर डिवीजन के रहनेवाले हैं। हेमंत सोरेन का पैतृक घर रामगढ़ के नेमरा में है, जबकि बाबूलाल मरांडी गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के कोदाईबांक के रहनेवाले हैं। दुमका विधानसभा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। दुमका का पूरा इलाका जनजातीय बहुल आबादी वाला है।

बेरमो में कांग्रेस को साख बचाने की चुनौती

झारखंड की रिक्त दूसरी विधानसभा सीट बेरमो कोयलांचल का इलाका है। यहां गैर जनजातीय आबादी कहीं ज्यादा है। कोयलांचल के इस इलाके में कोयला मजदूरों की बड़ी संख्या में हैं। कोयलांचल में बिहार, उत्तर प्रदेश के मजदूर बड़ी संख्या में आकर बसे हुए हैं। कांग्रेस के दिवंगत नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुमार जयमंगल सिंह ( उर्फ अनूप सिंह) कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस के भारतीय राष्ट्रीय मजदूर संगठन (इंटक) ने भी उन्हें राजेंद्र प्रसाद सिंह का उत्तराधिकारी बना दिया है।

इस चुनाव में दिवंगत राजेंद्र प्रसाद सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी अनूप सिंह से कहीं ज्यादा कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व को वोटर कसौटी पर कसेगा। यह सीट भाजपा जीतती रही है। कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीनी है। कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के नेतृत्व में 2019 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करनेवाली कांग्रेस के लिए सीट बचाना सरकार और संगठन के कामकाज पर ही मुहर लगनेवाला है। भाजपा यहां से पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय को उतार सकती है, जिनका टिकट काटकर आल झारखंड स्टूडेंटस यूनियन (आजसू पार्टी) को दे दी थी। संभावना यह भी है कि आजसू पार्टी बेरमो उपचुनाव लड़ने की भाजपा के सामने जिद कर बैठे। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यह सीट भाजपा लड़ेगी या आजसू के खाते में जाएगी।

राज्यसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देने की आजसू कीमत वसूल सकती है। सूबे में अभी उसके दो विधायक हैं। 81 विधायकों वाली झारखंड विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 29, भाजपा के 26 कांग्रेस के 17, आजसू के दो विधायकों के अलावा सात छोटे दलों और निर्दलीय विधायक हैं। 82 वें विधायक एंग्लो इंडियन मनोनीत होते हैं।

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