ज्ञान की देवी सरस्वती के विदेशों में हैं अलग-अलग नाम, आप भी जानिए

वसंत पंचमी का दिन देवी सरस्वती की आराधना का दिन माना जाता है। इस साल बसंत पंचमी 10 फरवरी के दिन मनाया जाएंगा। देवी सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जिनमें वाग्देवी, भारती, शारदा आदि नाम प्रमुख हैं। देवी सरस्वती की पूजा करने से मूर्ख व्यक्ती भी विद्वान बना सकती हैं।
शास्त्रो में देवी सरस्वती को शुक्लवर्णा और श्वेत वस्त्रधारिणी व वीणावादनी माना जाता है। देवी सरस्वती कमल के आसन पर विराजमान रहती है। बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा प्राचीन काल से ही भारत और नेपाल में की जाती रही है। माघ पंचमी, जिसे वसंत पंचमी कहा जाता हैं, उस दिन देवी सरस्वती की आराधना विशेष रूप से की जाती है।
देवी सरस्वती की आराधना भारत और नेपाल में ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में भी की जाती रही है। जिसमें इंडोनेशिया, म्यांमार, चीन, थाईलैंड, जापान प्रमुख देश हैं। देवी सरस्वती को इन देशों में अलग अलग नामों से जाना जाता है।
देवी सरस्वती को म्यांमार में थुयथदी, सूरस्सती और तिपिटका मेदा, चीन में बियानचाइत्यान, जापान में बेंजाइतेन और थाईलैंड में सुरसवदी के नाम से जाना जाता है। प्राचीन समय से ही ज्ञान के महत्व को समझा जाता है।
ज्ञान की देवी को अलग अलग नामों से जाना जाता है। व देवी सरस्वती की पूजा अलग अलग देश में अलग अलग तरीक से की जाती है। इसके साथ ही प्रत्येक देश में ज्ञान के महत्व पर जोर दिया जाता है। जापान की लोकप्रिय देवी बेंजाइतेन को हिंदू देवी सरस्वती का जापानी संस्करण कहा जाता है। इस देवी के नाम पर जापान में कई मंदिर हैं





