जो सेहत के लिए खतरा, वही बनेगा टेक का हीरो! कोलेस्ट्रॉल से बदलेगा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का ‘फ्यूचर’

भारतीय शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि कोलेस्ट्रॉल भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को शक्ति प्रदान कर सकता है। नई रिसर्च में कोलेस्ट्रॉल से बने खास मटीरियल का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक चिप्स को तेज, ठंडा और अधिक ऊर्जा-कुशल बनाया जा सकता है। यह तकनीक, जिसे स्पिनट्रॉनिक्स कहते हैं, इलेक्ट्रॉन की ‘स्पिन’ दिशा को नियंत्रित करती है, जिससे कम बिजली में अधिक काम संभव होगा। इससे डिवाइस बिना पावर के भी डेटा सुरक्षित रख सकेंगे और पर्यावरण के अनुकूल होंगे।

कोलेस्ट्रॉल, जिसे आमतौर पर दिल की बीमारियों से जोड़ कर देखा जाता है, अब फ्यूचर में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को ताकत देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। जी हां, भारतीय शोधकर्ताओं ने एक नई रिसर्च में इस बात का खुलासा किया है कि कोलेस्ट्रॉल से बने खास मटीरियल का यूज करके इलेक्ट्रॉनिक चिप्स को ज्यादा फास्ट, कूल और एनर्जी-एफ्फिसिएंट बनाया जा सकता है। चलिए इस नई रिसर्च के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या कहती है ये नई रिसर्च?

दरअसल, शोधकर्ताओं ने कोलेस्ट्रॉल मोलेक्युल्स को कॉपर और जिंक जैसे मेटल्स के आयनों के साथ जोड़कर नए मटीरियल तैयार किए हैं। ये मटीरियल अपने आप स्पाइरल स्ट्रक्चर बना लेते हैं, जो इलेक्ट्रॉन्स की ‘स्पिन’ डायरेक्शन को कंट्रोल करने में मदद करता है। यही टेक्नोलॉजी स्पिनट्रॉनिक्स कहलाती है।

क्यों है ये इतनी खास

अभी तक कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सिर्फ इलेक्ट्रॉन चार्ज पर काम करते हैं, लेकिन स्पिनट्रॉनिक्स में इलेक्ट्रॉन की स्पिन का भी यूज होता है। इससे कम बिजली में ज्यादा काम संभव होगा। साथ ही डिवाइस ज्यादा गर्म नहीं होंगे और बैटरी लाइफ भी लंबी होगी।

इससे क्या-क्या होंगे फायदे

इस टेक्नोलॉजी से बनने वाले डिवाइस बिना पावर के भी डेटा को सेफ रख सकेंगे। यानी बिजली जाने पर भी मोबाइल, लैपटॉप या अन्य गैजेट तुरंत दोबारा चालू हो सकेंगे। साथ ही डेटा सेंटर और बड़े सर्वर सिस्टम में एनर्जी कंजप्शन भी कम होगा।

फ्यूचर में कैसे मदद करेगी ये तकनीक?

शोधकर्ताओं का कहना है कि फ्यूचर में इसी तकनीक से ज्यादा तेज और ठंडे प्रोसेसर बना सकेंगे। साथ ही लो-पावर मेडिकल और साइंटिफिक सेंसर के साथ साथ कार्बन बेस्ड और एनवायरनमेंट फ्रेंडली इलेक्ट्रॉनिक्स तैयार किए जा सकेंगे।

हालांकि अभी ये रिसर्च लैब लेवल पर है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले वक्त में बायोलॉजिकल मोलेक्युल्स पर बेस्ड ये तकनीकें ज्यादा ड्यूरेबल, अफोर्डेबल और एनवायरनमेंट फ्रेंडली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का रास्ता खोलेंगी।

ओवरऑल कहें तो कोलेस्ट्रॉल जिसे अब तक हेल्थ के लिए खतरा माना जाता है, वही फ्यूचर में स्मार्ट और एनर्जी सेविंग वाली टेक्नोलॉजी में मदद कर सकता है।

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