जैकी श्रॉफ का दमदार अंदाज और बाल कलाकारों की मासूमियत, हर सीन में भरते हैं रंग

हिंदी सिनेमा में सुपरहीरो केंद्रित कृष सीरीज, ए फ्लाइंग जट्ट समेत गिनी चुनी फिल्में ही बनी हैं। इस कड़ी में सुपरहीरो फैंटेसी-कामेडी फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’ आई है। हालांकि यहां पर सुपरहीरो हरपल आसमान में उड़ने वाला या छूमंतर होने वाला पारंपरिक नायक नहीं बल्कि एक बुजुर्ग दादा है। दादा पोते को लेकर गढ़ी कहानी रोचक होने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।
रोचक है फिल्म की कहानी
कहानी होशियारपुर के आदर्श विद्यालय मंदिर स्कूल में छठी कक्षा में सितंबर में एडमिशन लेने वाले दीपू (मिहिर हर्षद गोडबोले) और उसके दादा जगदीश (Jackie Shroff) की है। दीपू काफी मेधावी है, लेकिन उसके पिता का जल्दी-जल्दी स्थानांतरण होता है। ऐसे में स्कूल में सहपाठियों से दोस्ती करने को लेकर काल्पनिक कहानी गढ़ता है कि उसके दादा सुपरहीरो हैं। अगर उनके ठिकाने का पता चल गया कि धरती पर एलियन का हमला हो सकता है।
अगर यह राज 18 साल के अधिक उम्र के लोगों को पता चला तो उनकी अलौकिक शक्तियां चली जाएंगी। उसकी इन बातों से उसका सहपाठी लड्डू (शिवांश चोरगे) अटूट विश्वास करता है। वह यह बात कक्षा के सभी सहपाठियों को भी बता देता है। हालांकि क्लास मानिटर चाणक्य (जिहान जितेंद्र होडार) इन दावों पर संदेह करता है और हर बात का प्रमाण मांगता है। फिर अजीबोगरीब वेशभूषा में दो व्यक्ति (सहर्ष शुक्ला और कुमार सौरभ) वहां पहुंचते हैं, तब जगदीश की कथित शक्तियों की परीक्षा का समय आ जाता है।
गुजराती फिल्मों का निर्देशन कर चुके राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मनीष सैनी ने पहली बार हिंदी फिल्म ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो : एलियन का आगमन (Great Grand Superhero: Aliens Ka Aagman) का लेखन और निर्देशन किया है। अभिनेत्री रेखा, माधुरी और सोनाली जैसे नामों के उल्लेख से अनुमान लगाया जा सकता है कि कहानी पिछली सदी के नौवें दशक में सेट है जब मोबाइल फोन नहीं होते थे।
मनीष की लिखी कहानी में नवीनता होने के साथ भरपूर मनोरंजन है। उनका यह प्रयास सराहनीय है। इंटरवल से पहले कहानी रोमांच और उत्सुकता बनाए रखती है। क्लाइमेक्स पर अगर थोड़ा और काम होता तो और बेहतरीन फिल्म होती।
क्या है फिल्म की खूबी?
बहरहाल, फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है बच्चों का अभिनय और चुटकीले संवाद। दीपू जिस आत्मविश्वास के साथ काल्पनिक कहानियां सुनाता है वह पूरी तरह विश्वसनीय लगता है। लड्डू द्वारा दादा को सुपरहीरो मानकर उन्हें मुफ्त में सामान देना, दादा का छिपकली से डरना और बच्चों का उनकी सच्चाई जानने के लिए जासूसी करना जैसे कई दृश्य मनोरंजक हैं। यह फिल्म पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है लेकिन कहीं भी उपदेशात्मक नहीं बनती।
बीच-बीच परिस्थिति के अनुसार आने वाले चुटकीले वाक्य जैसे ज्ञान बांटने से बढ़ता है, सत्य की खोज दिलचस्प लगते हैं। हालांकि एलियन को और प्रभावी बनाने की गुंजाइश थी। दीपू के पिता का बार- बार तबादला क्यों होता है उसकी जानकारी नहीं मिलती। फिल्म संवादों के जरिए कई बड़ी बातें भी कह जाती हैं।
मसलन जब दादा कहते हैं कि मुझे शाबाशी बहुत अच्छी लगती है। यह छोटा-सा संवाद मानवीय भावनाओं की गहरी सच्चाई को व्यक्त करता है। हर इंसान चाहता है कि उसकी सराहना हो और उसे यह महसूस कराया जाए कि वह महत्वपूर्ण है। इसी तरह दीपू के पिता का उन्हें सुपरहीरो बताना जैसे प्रसंग दिल को छूते हैं।
फिल्म के टेनक्निकल पहलू
सिनेमेटोग्राफर स्वाथी दीपक ने प्राकृतिक खूबसूरती के साथ परिवेश को बहुत बारीकी से कैमरे में कैद किया है। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के अनुरूप है और उसके भावों को उभारने में मदद करता है।
कलाकारों में दादा की भूमिका में जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) का काम बेहद प्रभावशाली है। बच्चों की टोली के साथ उनकी केमिस्ट्री शानदार है। वह साबित करते हैं कि इस भूमिका में उनसे बेहतर कोई और नहीं हो सकता था। फिल्म का खास आकर्षण हैं बाल कलाकार मिहिर हर्षद गोडबोले, शिवांश चोरगे और जिहान जितेंद्र होडार।
उनकी मासूमियत और सादगी मन मोह लेती है। वह हर दृश्य में रंग भरते हैं। भाग्यश्री मेहमान भूमिका में हैं। वह अपनी भूमिका साथ न्याय करती हैं। वहीं खोजी पत्रकार की भूमिका में दुर्गेश कुमार, पूर्व बाक्सिंग खिलाड़ी की भूमिका में वीरेंद्र सक्सेना का अभिनय भी सराहनीय है। एलियन की भूमिका में सहर्ष शुक्ला और कुमार सौरभ दमदार मौजूदगी दर्ज कराते हैं। खलनायक बनें प्रतीक स्मिता पाटिल दी गई भूमिका साथ न्याय करते हैं।
यह फिल्म हंसने-मुस्कुराने के साथ बचपन की कल्पनाशील दुनिया और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ने का अवसर देती है।





