जिन्होंने कभी विस्फोटक का परीक्षण तक नहीं किया, उन्होंने पाउडर को बता दिया पीईटीएन

यूपी विधानसभा में मिले जिस सफेद पाउडर को खतरनाक विस्फोटक पीईटीएन बताया गया, उसमें लखनऊ फोरेंसिक लैब की बड़ी लापरवाही सामने आई है। फोरेंसिक लैब के जिन अफसरों ने पाउडर की जांच की, उनमें से कोई भी विस्फोटक पदार्थ की जांच का विशेषज्ञ तक नहीं था। 
जिन्होंने कभी विस्फोटक का परीक्षण तक नहीं किया, उन्होंने पाउडर को बता दिया पीईटीएन
सूत्रों की मानें तो इन लोगों ने इससे पहले कभी विस्फोटक पदार्थ का परीक्षण तक नहीं किया था। लखनऊ लैब ने भी पहले कभी विस्फोटक पदार्थ की जांच नहीं की थी। इसके लिए सैंपल आगरा भेजा जाता रहा है।

विधानसभा मंडप में मिले संदिग्ध पाउडर की जांच के लिए हजरतगंज थाने में 12 जुलाई को जीडी 25/2017 पर अंकित करते हुए पाउडर का सैंपल डाकेट नंबर एलके 0006250 के साथ महानगर फारेंसिक लैब भेज दिया था। 

यहां डिप्टी डायरेक्ट अरुण कुमार शर्मा, साइंटिफिक अफसर नरेंद्र कुमार और वरिष्ठ साइंटिफिक असिस्टेंट मनोज कुमार ने जांच एक्सप्लोसिव डिटेक्शन किट से इसकी जांच की। अरुण फिजिक्स एंड कंप्यूटर साइंस के हेड हैं तो नरेंद्र उन्हीं के अंडर में कंप्यूटर साइंस विभाग में काम करते हैं। जबकि मनोज केमिस्ट्री डिवीजन के वरिष्ठ साइंटिफिक असिस्टेंट हैं।

लखनऊ एफएसएल ने आगरा भेजा था सैंपल

सूत्रों का कहना है कि सफेद पाउडर को 14 जुलाई को परीक्षण के बाद 15 जुलाई को 1182 केमिकल कोड के नंबरिंग और डाकेट नंबर 4870ईएक्स2017 के साथ आगरा लैब भेजा गया था। 

इसे लखनऊ फोरेंसिक लैब के नरेंद्र कुमार व श्याम सुंदर फारेंसिक एक्सप्लोसिव वैन से आगरा गए थे। वहां जाइंट डायरेक्टर एके मित्तल ने 5 सदस्यों की टीम से इसकी जांच कराई। 

इसमें डिप्टी डायरेक्टर केमिस्ट्री केके वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर एक्सप्लोसिव सुरेंद्र कुमार, डिप्टी डायरेक्टर टाक्सिकोलॉजी अजय कुमार, साइंटिफिक अफसर जयराज वीर और प्रमोद कुमार शामिल थे। कहा जा रहा है कि इस टीम ने 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अफसरों को लखनऊ भेज दी थी।

एटीएसआईजी असीम अरुण ने बताया कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियां अलग-अलग लैब से जांच कराती हैं। अगर एक दो दिन में एनआईए ने जांच टेकअप नहीं की तो एटीएस पाउडर का सैंपल जांच कराने के लिए दूसरी लैब में भेजेगी। उन्होंने बताया मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रदेश के गृह विभाग की ओर से एनआईए से जांच कराए जाने की संस्तुति कर दी गई थी। लेकिन अभी केंद्र की ओर से इसपर आगे की कार्रवाई नहीं की गई है।

 
 
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