जिंदगी बड़ी नेमतों से मिली है, इसे यूं ही खत्म न करें

- in धर्म

आत्महत्या पर पहली संस्थागत रिसर्च 1958 में लॉस एंजिल्स में हुई थी। जिसे दुनिया में मौत का दसवां सबसे बड़ा कारण माना जाता है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल दुनिया में एक से दो करोड़ से भी ज्यादा लोग आत्महत्या की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी मौत नहीं होती।यह तो बात हुई आत्महत्या के उस पहलू कि जिसे पढ़कर कोई भी हैरान हो सकते हैं। लेकिन अमूमन देखा गया है कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक या आध्यात्मिक है तो आत्महत्या के विचार उसके मन में कभी नहीं पनपेंगे और आप इस तरह का कोई कदम नहीं उठाएंगे। यह बात शास्त्रों में तो पहले ही लिख दी गई थी, इसे अब विज्ञान भी मानता है।

जिंदगी बड़ी नेमतों

 

आत्महत्या का मूल कारण दरअसल डिप्रेशन है।आत्महत्या के मानसिक, सामाजिक, साइकोलॉजिकल, बायोलॉजिकल एवं जेनेटिक कारण होते हैं। ऐसे व्यक्ति जिनमें आत्महत्या के जीन होते हैं, उनमें बायोकेमिकल परिवर्तन हो जाते हैं और वह आत्महत्या जैसा घृणित कदम उठाते हैं।

इसके कई कारण होते हैं जैसे तनावपूर्ण जीवन, घरेलू समस्याएं, मानसिक रोग आदि। जिन लोगों में आत्महत्या के बारे में सोचने की आदत (सुसाइडल फैंटेसी) होती है, वही आत्महत्या ज्यादा करते हैं।नकारात्मकता आत्महत्या की बहुत बड़ी वजह हैं क्योंकि इस समय आप सही सलाह नही ले पाते। वहीं आत्महत्या का विचार करने वाले लोग यदि धर्म और अध्यात्म का सहारा लें तो इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

 

युवावस्था संक्रमण काल है, युवाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासतौर से कॅरियर, जॉब, रिश्ते, खुद की इच्छाएं, व्यक्तिगत समस्याएं जैसे लव अफेयर, मैरिज, सैटलमेंट, भविष्य की पढ़ाई और भी कई समस्याएं हो सकती हैं।

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तो वहीं, ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा और चंद्रमा को मनु का कारक माना गया है। अष्टम चंद्रमा नीच राशि में अथवा राहु को शनि के साथ विष योग और केतु के साथ ग्रहण योग उत्पन्न करता है। ऐसे समय में मनुष्य की सोचने समझने की शक्ति कम कर देता है।

उसकी वजह से वो अपनी निर्णय शक्ति खो देता है। अगर 12वें भाव में ऐसी युति होने पर फांसी या आत्महत्या का योग बनता है। इसी तरह अनन्य भाव में अलग- अलग परिणाम उत्पन करता है।

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