जानिए, AAP के 16 विधायकों के खिलाफ अधिवक्ता ने क्‍यों वापस ली शिकायत

नई दिल्ली। दिल्ली में जिस शिकायत पर आम आदमी पार्टी (आप) के 16 और विधायकों की सदस्यता समाप्त होती नजर आ रही थी। शिकायतकर्ता ने इस मामले की अपनी शिकायत ही वापस ले ली है। शिकायत वापस लेते हुए शिकायतकर्ता अधिवक्ता विभोर आनंद ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के लोगों से उन्हें जान का खतरा है। शिकायतकर्ता के इस आरोप के बाद दिल्‍ली की सियासत को गरमाने के पूरे आसार हैं। यह तय माना जा रहा है कि विपक्ष अब दिल्‍ली सरकार पर हमलावर हो सकता है। उधर, चुनाव आयोग इस मामले में सख्‍त हो गया है। आरोप के बाद इस मामले की जांच करेगा।जानिए, AAP के 16 विधायकों के खिलाफ अधिवक्ता ने क्‍यों वापस ली शिकायत

आरोपी का कहना है कि कई बार ये लोग उनके साथ मारपीट तक चुके हैं। शिकायत करने के बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। इसलिए वह शिकायत वापस ले रहे हैं। अब यह चुनाव आयोग को तय करना है कि वह इस मामले में कार्रवाई जारी रखे या इसे रोक ले। आम आदमी पार्टी (आप) के 27 विधायकों पर लाभ के पद होने की शिकायत करने वाले आनंद ने राष्ट्रपति भवन और चुनाव आयोग को ऑनलाइन पत्र भेज दिया है। राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को भेजे गए अपने पत्र में लिखा है कि 2016 में जब उन्होंने आप के 27 विधायकों के खिलाफ शिकायत की थी।

उसी समय से उन्हें आप के लोगों द्वारा धमकियां मिल रही हैं, दुव्र्यवहार किया जा रहा है, प्रताडि़त किया जा रहा है। मारपीट भी कई गई है। हर घटना की उन्होंने दिल्ली पुलिस को शिकायत की है मगर पुलिस ने कुछ नहीं किया। पिछले एक सप्ताह से उन्हें धमकियां मिलने और प्रताडि़त किए जाने का सिलसिला अधिक बढ़ गया है। उन्होंने लिखा है कि मैं अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। इसे देखते हुए अपनी शिकायत वापस लेने के लिए राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को पत्र भेजा है।

विभोर ने कहा कि शिकायत वापस लेने के बाद कुछ लोग सोच सकते हैं कि इस मामले में उन्हें रिश्वत दी गई होगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में वह कहना चाहेंगे कि वे (आप के लोग) मुझे डर की रिश्वत देने में जरूर सफल रहे हैं। जिनके खिलाफ मैंने पुलिस को शिकायत की थी, काश दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सफल रही होती। जून 2016 में की गई इस शिकायत को राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के पास जांच करने के लिए भेज दिया था। उस समय से चुनाव आयोग इस मामले की जांच कर रहा है। इस मामले में चुनाव आयोग द्वारा सभी 27 विधायकों को 2016 में ही नोटिस भेजे जा चुके हैं।

आप के जिन 27 विधायकों पर रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाए जाने को लाभ का पद बताते हुए शिकायत हुई थी। इनमें से 10 विधायक संसदीय सचिव मामले में अयोग्य करार दिए जा चुके हैं, जबकि बवाना के पूर्व विधायक वेद प्रकाश पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। अब आप के 16 विधायक इस मामले में फंसे हुए हैं। यदि सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को लगता है कि ये सभी 16 विधायक लाभ के पद मामले मे आते हैं तो इनकी सदस्यता भी जा सकती है। आम आदमी पार्टी (आप) के 16 और विधायकों की सदस्यता समाप्त होने वाली शिकायत वापस लिया नजर आ रही थी। शिकायतकर्ता ने इस मामले की अपनी शिकायत ही वापस ले ली है।

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