जरूरी बात : बिना जागरूकता नहीं रुकेगा ये संक्रमण

धर्मेन्द्र मलिक
कोरोना वायरस छूत की महामारी है। सरकार के सामने नागरिकों की जागरूकता के बिना संक्रमण को रोक पाना चुनौती ही नहीं असंभव कार्य है।
आज समाज ही नहीं अपितु पूरे मानव सृष्टि एक ऐसी आपदा से जूझ रही है जिसका अभी चिकित्सा विज्ञान में न तो कोई ईलाज है और न हीं इसके सम्बन्ध में पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ ये वायरस संक्रमण आज पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले चुका है।
पूरी दुनिया की चिकित्सा विज्ञान एक दूसरे को जानकारी साझा कर रहे हैं और इस पर नियंत्रण पाया जा सके इसके लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन ईलाज के सम्बन्ध में अभी भी कोई निश्चितता या समय सीमा नहीं है। इस वायरस से मानव सभ्यता आर्थिक, सामाजिक चुनौती का सामना कर रही है। दुनिया की अपेक्षा आर्थिक रूप से समृद्ध यूरोपियन देश व चीन इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं।
आर्थिक रूप से समृद्ध देश भी न तो इस वायरल संक्रमण को रोक पा रहे हैं और न ही मौत पर काबू कर पा रहे हैं। किसी देश के दावे पर भी यकीन किया जाना सम्भव नहीं है। भारत में अगर ये वायरस तेजी से काबू में नहीं किया गया तो कुछ चिकित्सकों की मानें तो लाखों जानें जा सकती हैं। भारत में चिकित्सा पद्धति अभी अन्य देशों की तुलना में सुदृढ़ नहीं है।
भारत सरकार को स्वास्थय मंत्रालय द्वारा जारी कुछ आंकडों से स्पष्ट है कि भारत में 84 हजार लोगों पर एक आईसोलेशन बेड, 36 हजार लोगों पर एक क्वारंटाईन बेड है। आंकडों के मुताबिक स्थिति इतनी गम्भीर है कि 11,600 भारतीय पर एक डॉक्टर और 1826 भारतीयों के लिए अस्पताल में एक बेड है।
हम कोरोना के दूसरे चरण में है। इसकी प्रभावी रोकथाम मनुष्य के द्वारा ही सम्भव है। इस चरण में शारीरिक दूरी ही वायरस संक्रमण को रोकने का प्रभावकारी हथियार है। भविष्य में इसके लिए मानव बन्दी व लॉक डाउन की जरूरत है। जो इसे रोकने में कारगर हो सकता है। व्यक्ति को खुद यह निर्णय लेना होगा कि परिवार की सुरक्षा के लिए 15 दिनों के लिए खुद को आइसोलेट करना ही बेहतर रास्ता है अन्यथा नतीजें अकल्पनीय व भयावह हो सकते हैं।
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यह वायरस संक्रमण किस तरह से पैर पसारता है यह भी जानना जरूरी है।
पहली स्टेज
विदेश से कोई व्यक्ति आया हवाई अड्डे पर उसको बुखार नहीं था। उसे घर जाने दिया गया। उसे शपथ पत्र लिया गया कि वह घर में कैद रहेगा और बुखार व जुकाम होने पर सम्बन्धित नम्बर पर सूचना देगा। उस व्यक्ति ने घर जाकर शर्तों का पालन किया और घर एक कमरे में कैद होकर परिवार के सदस्यों से दूरी बनाए रखी। घर पर मम्मी पापा के आग्रह पर भी उसने शर्तों का पालन किया। एक सप्ताह उपरांत व्यक्ति को बुखार, सर्दी, खांसी जैसे लक्षण दिखाई दिये। जिसकी सूचना उसने हेल्पलाईन नम्बर पर दी। टेस्ट में वह कोरोना पॉजिटीव पाया गया, लेकिन घर के दूसरे लोग नेगेटिव मिले। उसके द्वारा नियमों के पालन से पूरा घर संक्रमित होने से बच गया और वह खुद भी एक सप्ताह के ईलाज के बाद ठीक होकर घर आ गया। यह पहली स्टेज है। जहां सिर्फ विदेश से आये व्यक्ति में कोराना है, लेकिन उसने यह दूसरों को नहीं बांटा।

दूसरी स्टेज
एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटीव पाया गया। उससे पिछली जानकारी प्राप्त की गई। जिसके आधार पर यह निकलकर आया कि वह विदेश नहीं गया था, लेकिन ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल में ही विदेश से लौटकर आया है। यह संक्रमण उसको ज्वैलरी शॉप से प्राप्त हुआ है। ज्वैलरी शॉप का मालिक विदेश घूमकर आया और हवाई अड्डे पर दिये गये शपथ पत्र का पालन नहीं किया। घर में सबके साथ रहकर खाना-पीना किया। इसके बाद वह दुकान पर ज्वैलरी बेचने लगा। एक सप्ताह बाद ज्वैलर सहित पूरे परिवार को बुखार आया और जांच में सभी पॉजिटीव पाए गए। यानि विदेश से आया व्यक्ति खुद पॉजिटीव फिर उसने घरवालों सहित दुकान पर सम्पर्क में आये ग्राहक नौकर-चाकर सहित 200-300 लोगों को संक्रमित कर दिया।
तीसरी स्टेज
किसी व्यक्ति को खांसी-बुखार की वजह से अस्पताल में भर्ती किया गया। यह व्यक्ति न कभी विदेश गया और न कभी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया जो कभी विदेश से लौटा हो। अब सवाल उठता है कि यह संक्रमण हुआ कैसे? पहली स्टेज में संक्रमित व्यक्ति खुद विदेश से आया था। दूसरी स्टेज में दुकानदार के सम्पर्क में आये हर व्यक्ति का टेस्ट किया गया। तीसरी स्टेज में स्रोत का पता हीं नहीं है। आखिर तीसरी स्टेज बनेगे कैसे?
दुकानदार के सम्पर्क में जो व्यक्ति आये सब लोग मिलाकर 300 थे। 10 लोगों का पता हीं नहीं। स्वास्थय विभाग और पुलिस उन लोगों को ढूँढ रही है। उन 10 में से अगर कोई मन्दिर, कोई मस्जिद, कोई गुरूद्वारा में गया तो वहां पर यह वायरस खूब फैला, लेकिन आपको को स्रोत का पता नहीं।
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कोरोनावायरस (कोविड-19) जमीन, धातु, प्लास्टिक की सतहों पर और हवा में कई घंटों तक जीवित रहता है। यह नया अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि वायरस एरोसोल में तीन घंटे तक, तांबे पर चार घंटे तक, कार्डबोर्ड (लकड़ी के गत्ते) पर 24 घंटे तक और प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील पर दो से तीन दिन तक जीवित रह सकता है। उल्लेखनीय है कि एरोसोल हवा या किसी अन्य गैस में ठोस कण या तरल बूंदे हैं, एरोसोल प्राकृतिक या मानवजनित हो सकता है।
सह-अध्ययनकर्ता जेम्स लॉयड-स्मिथ और पारिस्थितिकी और विकासवादी जीवविज्ञान के यूसीएलए प्रोफेसर ने कहा कि यह वायरस संपर्क में आने से काफी संक्रामक हो जाता है। यदि आप उन वस्तुओं को छू रहे हैं, जिन्हें किसी संक्रमित व्यक्ति ने हाल ही में छुआ है, तो आपको भी संक्रमण हो सकता है और आपके माध्यम से कोरोनावायरस दूसरों में फैल सकता है, इसलिए हाथ धोना जरुरी है।
अध्ययनकर्ता यूसीएलए, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र, और प्रिंसटन विश्वविद्यालय से हैं।
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नोवेल कोरोनो वायरस बीमारी (कोविड-19) हमारी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. ऐसे में, यह समझने की जरूरत है कि सब के लिए स्वच्छ और सुलभ तरीके से पानी की उपलब्धता कितना महत्वपूर्ण है।
इस महामारी से बचने का एकमात्र अचूक उपाय यही है कि हम लगातार अपने हाथों को हर बार 20 सेकंड तक धोएं। यानी, साफ पानी रोगों के रोकथाम के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। ऐसे में, नोवेल कोरोनो वायरस जैसे वैश्विक दुश्मन को हराने में पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण निर्धारक होगी।
बचाव क्या है
14 दिन की सामूहिक बन्दी करें। कोई बाहर न निकलें। बन्दी का पालन न करने वालो पर कार्यवाही हो। नागरिकों के लिए आर्थिक पैकेज व राशन की व्यवस्था की जाए। आवश्यक वस्तुओं की सरकार द्वारा आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। हर आदमी को मास्क और सेनेटाईजर मुफ्त बांटे जाएं। हैल्थ चेकअप कैम्प लगायें जाएं। अनावश्यक सड़कों पर घूमने वालों के चालान किए जाएं। खाने पीने की चीजों और मेडिकल वस्तुओं की मुनाफाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर कठोर कार्यवाही की जाए।
आज भी भारत में तमाम अपर्याप्त असुविधाओं और वायरस संक्रमण की जानकारी के बावजूद भी भारतीय नागरिक इसका मजाक बनाने से नहीं मान रहे हैं। जबकि शारीरिक दूरी ही उत्तम उपाय है। आज भी हम गौमूत्र पार्टी, मस्जिद में नमाज इकट्ठे होकर बन्दी का जश्न मनाने से पीछे नहीं हट रहें हैं। प्रोपगेण्डा मशीनरी भी आपको भ्रमित कर रही है। आप अन्धविश्वासों की मानिए, लेकिन भीड़ से दूर रहकर कुछ समय घर में बिताकर इस वायरस को मात दे सकते हैं। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में व मलिन बस्तियों में संक्रमण को लेकर प्रभावी जानकारी नहीं हैं।
(लेखक भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी हैं)

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