जनपद की पहली डिजिटल बेटी के रूप में दीपिका तिवारी का चयन

गोण्डा। इलेक्ट्रॉनिक और सुचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत चलाये जा रहे सीएससी द्वारा जनपद के महिला वीएलई दीपिका तिवारी को जनपद की प्रथम डिजिटल बेटी के रूप में चयनित किया गया है। इनका चयन सीएससी संचालक संदीप तिवारी द्वारा क्षेत्र में किये गए डिजिटल साक्षरता मिशन के अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए किया गया है।

दीपिका तिवारी सीएससी के माध्यम से सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओ को जन-जन तक पंहुचा कर ग्रामीणों की मदद कर रही है। चाहे वह डिजिपे की माध्यम से पैसा निकलना हो या आयुष्मान कार्ड बनाना हो या जीवन प्रमाण पत्र बनाना बिजली बिल जमा करना जीवन बिमा किश्त जमा करना प्रधान मंत्री फसल बीमा किसान पंजीकरण आदि सेवाएं ग्रामीणों तक पंहुचा रही है। अभी तक इनके द्वारा 300 से ज्यादा कण्डीडेट्स को प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता मिशन के तहत प्रशिक्षण भी दिया जा चूका है।

सीएससी ई-गवर्नेंस के जिला प्रबंधक सुनील तिवारी ने बताया की जनपद के ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों और महिलाओं को फेसबुक द्वारा डिजिटल मार्केटिंग, जॉब्स, आजीविका और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में प्रशिक्षित कर जागरूकता प्रदान के लिए दीपिका का चयन हुआ है।

उल्लेखनीय है कि डिजिटल बेटी प्रोग्राम सीएससी एकैडेमी और फेसबुक की एक संयुक्त पहल है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय करने वाली महिलाओं को मज़बूत बनाकर डिजिटल जेंडर गैप को कम करना है, ताकि वे अपने बिज़नेस को बढ़ा सकें और बाजार तक पहुंच सकें। ये महिलाओं और उनके कम्युनिटी के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही आजीविका के अवसर पैदा करके उन्हें सक्षम बनाता है।

सीएससी डिजिटल बेटी योजना एक डिजिटल लिटरेसी स्कीम है। इसमें सीएससी के साथ काम करने वाली डिजिटल बेटी के लिए प्रशिक्षित कुछ महिला वीएलई अपने क्षेत्र की बेटियों, महिलाओं को फेसबुक इंटरनेट आज चलाने की ट्रेनिंग देंगी, जिससे वे सोशल मीडिया से जुड़कर देश-विदेश की जानकारियों को साझा कर सकें। इस प्रोग्राम के द्वारा महिलाएं इंटरनेट पर अपनी प्राइवेसी और सेफ्टी के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगी। ट्रेनिंग संपन्न होने के बाद महिलाओं को डिजिटल बेटी सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जायेगा।

वर्तमान में डिजिटल बेटी प्रोग्राम को ग्रामीण स्तर पर व्यवसाय करने वाले 5,000 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो बदले में मास्टर ट्रेनर के रूप में भारत के 10 राज्यों के 3,000 से अधिक गांवों में, व्यवसायी बनने की इच्छा रखने वाली 250,000 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगे।

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