चौपट होता दूध बाजार, पशुपालकों कि हालत खराब

लखनऊ : कोरोना का कहर दूध एवं दुग्ध उत्पादों के बाजारों पर भी बरपना शुरू हो गया है। स्थिति यह हो गई है दुग्ध उत्पाद के रूप में बिकने वाले घी, मक्खन, पनीर एवं दही का कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है जबकि होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, मिठाई की दुकानें एवं भोजन आदि का आयोजन बंद होने के कारण दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ दूध की मांग भी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
कहा जा रही कि अगर दूध एवं उससे बनी वस्तुओं की मांग शीघ्र शुरू नहीं हुई तो मिल्क इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसका सीधा असर पशुपालकों एवं किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। कोरोना वायरस की वजह से जारी देशव्यापी बंदी या लॉकडाउन के कारण पूरे प्रदेश में दूध की खपत वाले प्रमुख स्थान जैसे होटल-रेस्टोरेंट,ढाबे, मिठाइयों की दुकानें एवं शहरों में जगह-जगह खुलने वाले चाय कॉफी की दुकानें पूरी तरह से बंद हो गई हैं। इससे दूध की मांग करीब 45 से 50 प्रतिशत नीचे आ गया है।
यूपी में विभिन्न कम्पनियों की ओर से प्रतिदिन करीब 22.88 लाख लीटर दूध ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदकर शहरों में 17.52 लाख दूध की आपूर्ति की जा रही है। दूसरी तरफ दूधिया के शहर की ओर नहीं जा पाने या कम आने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की भरमार हो गई है।
कम्पनियों को दूध की अपेक्षा दुग्ध उत्पादों की बिक्री में अधिक लाभ प्राप्त होता है। इस समय दुग्ध उत्पादों का बाजार करीब-करीब ठप है। ऐसे में दूध कंपनियां बाजार में मांग कम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बने अपने कलेक्शन सेंटरों पर दूध की मांग बढ़ाने को तैयार नहीं है। जिससे ग्रामीण इलाकों में दूध के कारोबार में लगे ग्रामीणों के साथ-साथ दुग्ध बाजार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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