चीन में ईसाइयों को बनाया जा रहा निशाना, बाइबिल रखने पर सख्ती

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चलाए जा रहे एक अभियान के तहत धार्मिक संगठनों को अपने सिद्धांतों, रीति-रिवाजों और नैतिकता को चीनी संस्कृति के अनुरूप ढालने के लिए बाध्य किया जा रहा है। सबसे ज्यादा निशाने पर ईसाई हैं।

श्रीलंका के प्रमुख मीडिया आउटलेट ‘सीलोन वायर न्यूज’ की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि इस अभियान के परिणामस्वरूप कई चर्चों और क्रॉस को ध्वस्त कर दिया गया है, बाइबिल रखने पर सख्ती की जा रही है और सरकार द्वारा अधिकृत न की गई धार्मिक सामग्रियों पर प्रतिबंध या उन्हें जब्त कर लिया गया है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट के अनुसार, “जब दुनिया बेहतर जीवन की उम्मीदों के साथ नए वर्ष (2026) में प्रवेश कर रही थी, तब चीन में ईसाइयों ने इसके विपरीत उदासी और पीड़ा के साथ नए साल की शुरुआत की। चेंगदू में एक प्रोटेस्टेंट चर्च के कई प्रमुख पादरियों को हिरासत में लिया गया और वेनझोउ में यायांग चर्च की इमारत को चीनी अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। चिनफिंग के सत्ता संभालने के बाद से दमनकारी प्रयासों के कारण पादरियों का उत्पीड़न, सामूहिक सभाओं पर प्रतिबंध और यहां तक कि ईसाई प्रतीकों को हटाना एवं चर्च की इमारतों को नष्ट करना जैसी घटनाएं हुई हैं।”

उठ रही तत्काल रिहाई की मांग

चेंगदू में हुई गिरफ्तारियों पर ह्यूमन राइट्स वाच के चीनी शोधकर्ता यालकुन उलुयोल ने चिंता जताई है और उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है। कुछ सप्ताह पहले पुलिसकर्मियों ने यायांग टाउन में एक और प्रोटेस्टेंट चर्च पर छापा मारा और लगभग 100 सदस्यों को गिरफ्तार किया।

अमेरिका स्थित प्यू रिसर्च सेंटर का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि चिनफिंग के शासनकाल में बढ़ते प्रतिबंधों और धार्मिक दमन के कारण हाल के वर्षों में चीन में ईसाइयों की संख्या स्थिर हो गई है।

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