घटता ध्यान, बढ़ती बेचैनी; जानिए शॉर्ट वीडियो की लत आपके बच्चों के दिमाग पर क्या असर डाल रही है?

आज के समय में इंटरनेट का रूप पूरी तरह बदल चुका है। जहां पहले हम लंबी फिल्में और जानकारी वाली वीडियो देखते थे, वहीं अब शॉर्ट फॉर्म वीडियो या रील्स का बोलबाला है। हर कुछ सेकंड पर एक नई वीडियो हमारे फोन की स्क्रीन पर आ जाती है।

लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि पलक झपकते खत्म होने वाली ये वीडियो हमारे दिमाग पर क्या असर डाल रही है? हाल ही में, यूट्यूब के को-फाउंडर स्टीव चेन ने भी इस बारे में चिंता जाहिर की। उनके अनुसार ये छोटे वीडियो बच्चों और युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आइए समझते हैं इस बारे में।

घटता ध्यान और बढ़ती बेचैनी
अगर बच्चे बचपन से ही केवल कुछ सेकंड के वीडियो देखने के आदी हो जाएंगे, तो वे भविष्य में लंबी और गंभीर जानकारी पर फोकस नहीं कर पाएंगे। जब दिमाग को हर 15-20 सेकंड में नया शॉर्ट फॉर्म कंटेंट देखने की आदत पड़ जाती है, तो 15 मिनट का कोई भी 30 सेकंड से ज्यादा की उपयोगी वीडियो देखना या किताब पढ़ना उन्हें मुश्किल और बोरिंग लगने लगती है।

यह केवल मनोरंजन का मामला नहीं है, बल्कि एक आदत का है। जब दिमाग लगातार तेजी से बदलते सीन्स का अनुभव करता है, तो वह क्विक रिवॉर्ड खोजने लगता है। इससे बच्चों की धैर्य से बैठने और सीखने की क्षमता कम हो सकती है।

छोटे वीडियो की बढ़ती लत
छोटे वीडियो की यह लत अब कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी विवादों का कारण भी बन रही है। कई देशों में सोशल मीडिया कंपनियों को इस बात के लिए अदालतों में घसीटा जा रहा है कि उनके प्लेटफॉर्म युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और लत पैदा कर रहे हैं।

एक शोध के अनुसार, शॉर्ट-वीडियो की लत का सीधा कनेक्शन छात्रों में पढ़ाई टालने की आदत से है। जो युवा इन वीडियो पर ज्यादा समय बिताते हैं, उनमें फोकस की कमी पाई गई है। वे जरूरी कामों को टालकर छोटे-छोटे वीडियो से मिलने वाले डोपामाइन हिट के पीछे भागते हैं।

पीछे छूटता यूजफुल कंटेंट
आजकल लगभग हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म छोटे वीडियो के फॉर्मेट को अपना रहा है। ये शॉर्ट-वीडियो सिर्फ मनोरंजन के लिए तो ठीक हैं, लेकिन इनमें गहराई की कमी होती है। कंपनियों के बीच ज्यादा से ज्यादा यूजर अटेंशन पाने की होड़ मची है, जिसके चक्कर में यूजफुल और इंफॉर्मेटिव कंटेंट पीछे छूटता जा रहा है।

इंटरनेट की संस्कृति बदल रही है। अब वीडियो छोटे हो रहे हैं और एल्गोरिदम तेज। शॉर्ट-वीडियो देखना पूरी तरह बंद नहीं कर सकते, लेकिन अब समय आ गया है कि हम इसके सुरक्षित इस्तेमाल, उम्र की पाबंदियों और टाइम लिमिट पर गंभीरता से विचार करें, ताकि बच्चों के दिमाग पर इनका असर कम से कम असर पड़े।

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