गौतम अदाणी को बड़ी राहत! US SEC जैसा भारत वाला केस हुआ बंद

कॉम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (Competition Commission of India) की ओर से भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी को बड़ी राहत मिली है। CCI ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों और अन्य के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। दरअसल, शिकायतकर्ता रवि शर्मा ने अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी ग्रीन एनर्जी, गौतम अदाणी, सागर अदाणी, एज्योर पावर इंडिया, SECI और कई राज्य बिजली यूटिलिटीज पर प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

इस खबर का असर गौतम अदाणी की अदाणी ग्रुप की कंपनियों पर देखा गया। Adani Green और Adani Power के शेयरों में तेजी देखी गई। 17 अप्रैल को अदाणी ग्रीन के शेयर पिछले बंद भाव 1118.55 की अपेक्षा 1146.00 रुपये के उच्चतम स्तर तक गए।

शिकायतकर्ता ने अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ( Adani US SEC Case) द्वारा 2024 में दायर आरोप-पत्र का हवाला भी दिया, जिसमें दावा किया गया था कि अदाणी ग्रुप की कंपनियों ने Azure Power के साथ मिलकर कई रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स हासिल किए। CCI इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

अदाणी ग्रुप के खिलाफ सबूत की कमी
कॉम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया को सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) द्वारा दिए गए टेंडर में किसी भी तरह के कॉम्पटीशन को कमजोर या खत्म करने वाली गतिविधि का प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं मिला। क्योंकि इस बाजार में कई सार्वजनिक और निजी कंपनियां सक्रिय हैं। इसलिए बाजार के दुरुपयोग (Abuse of Dominance) का आरोप खारिज कर दिया गया।

इसके अलावा आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया कि सोलर पावर को अलग बाजार माना जाए या सार्वजनिक-निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को अलग से देखा जाए।

अदाणी पर शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए थे?
शिकायतकर्ता ने अदाणी ग्रुप के खिलाफ आरोप लगाया था कि सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) का 2019 का 7 GW सोलर पावर प्रोजेक्ट्स का टेंडर बड़े खिलाड़ियों जैसे अदाणी और एज्योर पावर को फायदा पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया था।

टेंडर की कुछ शर्तें (जैसे ग्रीन शू ऑप्शन और टैरिफ रिवीजन) छोटी कंपनियों को बाहर रखती थीं और प्रतिस्पर्धा को सीमित करती थीं। इसके अलावा, उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि टेंडर दस्तावेज पावर मंत्रालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके तैयार किया गया था, जिसमें सोलर पावर यूनिट्स को सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के साथ जोड़ने की अनुमति नहीं है।

शिकायतकर्ता ने आगे अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा 2024 में दायर आरोप-पत्र का हवाला भी दिया, जिसमें दावा किया गया था कि अदाणी ग्रुप की कंपनियों ने एज्योर पावर के साथ मिलकर बाजार के दुरुपयोग और प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के जरिए कई रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स हासिल किए हैं।

जांच की जरूरत नहीं-CCI
CCI ने अदाणी ग्रुप और अन्य पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने ऐसे किसी भी तरह के ठोस सबूत नहीं दिए जिससे कि सोलर पावर को अलग बाजार माना जाए या सार्वजनिक-निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को अलग से देखा जाए। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि धारा 3 और धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करने का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता, इसलिए इस मामले में कोई जांच की जरूरत नहीं है। इसलिए मामाला बंद किया जा रहा है।

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