क्या है यूपी में भाजपा का मिशन 2019, अमित शाह के दौरे के मायने क्या?


भाजपा जातियों की मजबूत गोलबंदी से विरोधियों को पस्त करके, खासतौर से यादव व जाटव की ताकत पर खड़ी सपा व बसपा की बुनियाद कमजोर करना चाहती है ताकि लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता की संभावनाएं 2014 व 2017 के मुकाबले ज्यादा मजबूत और आसान हो जाएं।
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लोकसभा चुनाव में गैर यादव पिछड़े और गैर जाटव दलित वोटों के साथ अगड़ों की गोलबंदी से जीत हासिल करने वाली भाजपा को विधानसभा चुनाव में मुलायम परिवार में बिखराव के चलते सपा के वोट भाजपा के पाले में आते दिखे और मायावती के मुस्लिम एजेंडे को धार देने की प्रतिक्रिया स्वरूप गैर जाटव दलित के साथ कुछ जाटव बिरादरी के वोट भी मिले।
साथ ही यादव व जाटव जैसी खास जातियों को भाजपा के साथ लाकर न सिर्फ सियासी समीकरण ठीक किए जा सकते हैं बल्कि संघ के बृहद हिंदू समाज की एकजुटता और सामाजिक समरसता वाला समाज बनाने की कल्पना भी साकार की जा सकती है।
ठीक ही कर रही है भाजपा
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक राजनाथ सिंह सूर्य का कहना है कि संघ का लक्ष्य तो शुरू से ही समग्र हिंदू समाज को एकजुट करना रहा है जिसमें जातीय खांचे संघर्ष का कारण न बनें। भाजपा की पहुंच अभी तक यादव और जाटव समाज के बीच नहीं थी।
इसलिए संघ की विचारधारा से आगे बढ़ रहे भाजपा के इस अभियान पर आगे बढ़ने में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। सूर्य कहते हैं, कोई दल अगर सत्ता पाने के लिए ऐसा कर रहा है तो इसमें कोई हर्ज नहीं। हां, सरकार लोक कल्याणकारी होनी चाहिए। सूर्य की बात और प्रदेश की परिस्थितियों पर नजर डालें तो समझ में आ जाता है कि इस समय यह अभियान शुरू करने के खास कारण हैं।
भगवा टोली को लगा कि इन संयोगों को सियासी समीकरण में बदलने का यही सही वक्त है। उसी रणनीति पर उसने काम शुरू किया है। लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मोदी और शाह ने मंदिर का नाम भले नहीं लिया लेकिन हिंदुत्व के रंग से वोटों के गणित को अनुकूल बनाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी।
शाह ने लखनऊ प्रवास में जिस तरह कहा कि भाजपा सरकारें विकास सबका करेंगी लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं, अयोध्या में मंदिर निर्माण सुलह-समझौते से होगा अथवा कानूनी तरीके से, इससे समझा जा सकता है कि यादव व जाटव को जोड़ने का अभियान भी चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने के लिए भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ाने का हिस्सा ही है।
भाजपा के रणनीतिकारों को पता है कि 2019 के चुनाव में केंद्र और प्रदेश सरकार के काम भी कसौटी पर होंगे। सत्ता में होने के नाते कुछ असंतुष्ट तबकों का असंतोष भी चुनौतियां बढ़ाएगा।
संभवत: इसीलिए भाजपा के रणनीतिकार प्रदेश में मिशन 2019 के तहत पार्टी का मत 60 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। पिछड़ों में यादव और दलितों में जाटव वोट ही मुख्य रूप से मुलायम और मायावती के चलते अब तक भाजपा की पकड़ में नहीं हैं।
पर, जिस तरह यादव परिवार में बिखराव हुआ है और मुलायम व शिवपाल मोदी और योगी सरकार की तारीफ कर रहे हैं और बसपा भी लगातार कमजोर हो रही है, उसके चलते ये तबके भाजपा से जुड़ सकते हैं।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का लखनऊ में यादव और जाटव के साथ पिछड़े व दलित तबके की राजनीतिक रूप से उपेक्षित अन्य छोटी जातियों को जोड़ने पर जोर इसी लक्ष्य का हिस्सा नजर आता है।
उधर, बिहार घटनाक्रम के बाद शरद यादव जैसे यादव चेहरे और शिवपाल की जद (यू) से नजदीकी की खबरों के चलते उनके भाजपा के पक्ष में खड़े होने की संभावना बन रही है, उससे भीर भाजपा के रणनीतिकार उत्साहित हैं। इनका मानना है कि वे सियासी गणित दुरुस्त कर मत प्रतिशत को 60 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफल होंगे।





