क्या है पैक्स सिलिका, जिसका पूर्णकालिक सदस्य बनेगा भारत

अमेरिका के नए एम्बेसडर सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने सोमवार को कहा कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल Pax Silica में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह पहल सिलिकॉन, उन्नत विनिर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित है।

भारत पहुंचने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में गोर ने कहा कि बदलती वैश्विक तकनीकी और आपूर्ति-शृंखला राजनीति के बावजूद भारत-अमेरिका संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, ”असली दोस्त असहमति रख सकते हैं, लेकिन वे हमेशा समाधान निकालते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देश लगातार सक्रिय संवाद में बने हुए हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों में रणनीतिक संकेत

पैक्स सिलिका में भारत को शामिल करने का प्रस्ताव भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत माना जा रहा है, खासकर उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में। गोर के अनुसार, यह पहल कच्चे खनिजों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकी अनुप्रयोगों तक पूरे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को कवर करती है।

उन्होंने कहा, “पैक्स सिलिका एक अमेरिकी नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल है, जो क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तक फैली हुई है,” और इसकी पुष्टि की कि भारत को इस समूह में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।

क्या है पैक्स सिलिका?

पैक्स सिलिका का उद्देश्य एक सुरक्षित, नवाचार-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन तैयार करना है। इसमें क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा इनपुट, सेमीकंडक्टर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। यह पहल भरोसेमंद साझेदार देशों के बीच सहयोग पर आधारित है और उन निर्भरताओं को कम करने का प्रयास करती है, जिन्हें भविष्य की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए संवेदनशील माना जाता है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कोई बहिष्करणकारी समूह नहीं, बल्कि ‘पॉजिटिव-सम’ साझेदारी है, जिसका लक्ष्य तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बने रहना और संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

पैक्स सिलिका के मौजूदा सदस्य

पैक्स सिलिका के पहले शिखर सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा और OECD की ओर से अतिथि योगदान भी मिला।

भारत की भूमिका क्यों अहम

इन देशों में वैश्विक सेमीकंडक्टर और एआई सप्लाई चेन से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियां और निवेशक मौजूद हैं। भारत की प्रस्तावित भागीदारी उसे नीति समन्वय, निष्पक्ष बाजार प्रथाओं और दीर्घकालिक तकनीकी लचीलापन पर केंद्रित इस मंच का हिस्सा बना देगी। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय शक्ति को नई दिशा दे रही है, वैसे-वैसे पैक्स सिलिका जैसी पहलें भविष्य की वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारत का इसमें शामिल होना उसकी बढ़ती तकनीकी महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में मजबूत भूमिका को दर्शाता है।

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