क्या सिगरेट पीने से सच में स्ट्रेस कम होता है या सिर्फ दिमाग का भ्रम है?

ऑफिस में काम के प्रेशर या घर के किसी स्ट्रेस को कम करने के लिए क्या आप भी सिगरेट का सहारा लेते हैं? बहुत से लोगों का यह मानना है कि सिगरेट पीने से उनका स्ट्रेस कम होता है और उन्हें शांत रहने में मदद मिलती है।
लेकिन क्या सचमुच सिगरेट से तनाव कम होता है या सिर्फ आपके दिमाग का एक भ्रम है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने डॉ. गायत्री भाटिया (कंसल्टेंट साइकायट्री, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से बात की। आइए जानें इस बारे में उनका क्या कहना है।
निकोटीन का दिमाग पर असर
तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटीन एक बेहद नशीला केमिकल है। जब कोई व्यक्ति सिगरेट पीता है, तो यह केमिकल बहुत तेजी से दिमाग तक पहुंचता है और वहां पहुंचकर यह डोपामाइन रिलीज करता है। डोपामाइ प्लेजर और रिवॉर्ड का एहसास करवाने वाला हार्मोन है। यही कारण है कि सिगरेट पीते ही अचानक कुछ समय के लिए आराम का एहसास होता है।
हालांकि, सिगरेट से मिलने वाली यह राहत बहुत ही कम समय के लिए होती है। जैसे ही शरीर में निकोटीन का स्तर कम होने लगता है, वैसे ही शरीर पर इसके उल्टे असर दिखने लगते हैं। निकोटीन का स्तर गिरते ही व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, एंग्जायटी और फोकस करने में परेशानी जैसे विड्रॉल सिमटम्स सामने लगते हैं।
स्ट्रेस कम होता है?
असल में, जब स्मोक करने वाले दोबारा सिगरेट पीते हैं, तो वे अपनी असली चिंताओं से राहत नहीं पा रहे होते। वे केवल निकोटीन की कमी से पैदा हुई बेचैनी और चिड़चिड़ेपन को शांत कर रहे होते हैं। कई स्मोक करने वाले लोग इन लक्षणों के दूर होने को ही तनाव से राहत समझने की भूल कर बैठते हैं।
इतना ही नहीं, कई रिसर्च भी ये दावा कर चुकी हैं कि स्मोक न करने वाले लोगों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में चिंता और तनाव का सामान्य स्तर हमेशा ज्यादा होता है। वहीं, जो लोग सिगरेट पीना छोड़ देते हैं, उनके मूड में लंबे समय के लिए सुधार देखा गया है। स्मोकिंग छोड़ने से चिंता कम होती है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनता है।
निकोटीन पर निर्भरता
सिगरेट आपके जीवन में तनाव पैदा करने वाले असली कारणों को कभी हल नहीं करती। असल में, निकोटीन समय के साथ दिमाग में एक ऐसा साइकिल बना देता है, जहां दिमाग सामान्य महसूस करने के लिए भी सिगरेट पर निर्भर रहने लगता है। यह निर्भरता स्ट्रेस मैनेज करना आसान बनाने के बजाय और ज्यादा कठिन बना देती है।





