कोरोना ड्यूटी पर युवा डॉक्टर का हर दिन क्या रहता है रूटीन, घर बैठे जानिए अस्पतालों का हाल?

नई दिल्ली: मणिपुर के छोटे शहर से दिल्ली आईं युवा डॉक्टर अंजुता का जज़्बा कई मायनों में बेमिसाल है. डॉ अंजुता भी आज हर युवा डॉक्टर की तरह दिन-रात Covid-19 के खिलाफ जंग में फ्रंटलाइन पर रह कर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रही हैं. महामारी देश-दुनिया के लिए संकट है तो डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ समेत तमाम मेडिकल बिरादरी भारी दबाव के बावजूद बिना माथे पर कोई शिकन लाए मोर्चे पर डटे हैं.
कोई मरीज दर्द से कराहता है तो उसकी टीस 26 साल की डॉ अंजुता जैसे युवा डॉक्टरों को अपने दिल में भी महसूस होती है. उनके चेहरे पर मुस्कान और संतोष तभी देखा जाता है जब किसी मरीज की Covid-19 रिपोर्ट निगेटिव आती है. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू बाल चिकित्सालय में तैनात जूनियर डॉक्टर डॉ अंजुता का प्रोफेशन के लिए समर्पण देखने लायक है. बेशक प्रोफेशनल करियर के शुरुआती दौर में ही इस अभूतपूर्व कोरोना संकट का सामना है.
मणिपुर में घर से सैकड़ों मील दूर दिल्ली में अकेले रह कर सख्त ड्यूटी देने के साथ अपनी इम्युनिटी बनाए रखने का ख्याल भी रखना कम बड़ी चुनौती नहीं है. युवा डॉक्टरों को हर दिन किन हालात से गुज़रना पड़ता है, ये जानने के लिए आजतक/इंडिया टुडे की इस रिपोर्टर ने डॉ अंजुता के डेली रूटीन को बारीकी से देखा.
ड्यूटी पर रूटीन
कोरोना जैसे खतरनाक दुश्मन से नीली वर्दी में मोर्चा, मरीजों के वाइटल्स (शरीर के अहम अंगों की फंक्शनिंग) पर हर वक्त चौकस नजर रखना, कभी फ्लू वार्ड तो कभी ओपीडी तो कभी इमरजेसी में शिफ्ट की अदला बदली, कभी किसी मरीज को हौसला देना, सहयोगियों से हल्की-फुल्की बात करके तनाव दूर करना. कोई मरीज अच्छा हुआ या किसी की तबीयत खराब हुई तो उन सभी पलों को आपस में बांटना, ड्यूटी पर रहते वक्त डॉ अंजुता का यही रूटीन है. थके होने के बावजूद चाय के लिए भी कम ही ब्रेक मिल पाता है.
Covid ड्यूटी देते वक्त PPE किट समेत चाहे तमाम ऐहतियात बरती जाएं लेकिन ड़ॉक्टर समेत हेल्थकेयर स्टाफ होते तो इनसान ही हैं. डॉ अंजुता का Covid-19 टेस्ट निगेटिव आ चुका है. इस बारे में डॉ अंजुता ने कहा, “जब टेस्ट हुआ तो मैं कोरोना ड्यूटी पर ही थी. उन्होंने सेम्पल के लिए बोला. एक बार तो डर लगा क्योंकि मैं मरीजों की स्क्रीनिंग करती थी. कौन क्या है, कुछ पता नहीं रहता. अधिकतर इंफेक्शन का खतरा तभी होता है.”
ड्यूटी से रूम पहुंचने पर पानी पूछने वाला भी कोई नहीं
अस्पताल वाहन की ड्रॉपिंग से डॉ अंजुता सीधे अपने किराए के रूम पर वापस आती हैं. रास्ते में तभी रूकती हैं जब दूध, ब्रेड, खाने का सामान जैसी दैनिक इस्तेमाल की कोई चीज खरीदनी हो. थके हारे ड्यूटी देने से आने के बाद चाय-पानी देने वाला कोई अपना भी नहीं होता. इसकी जगह बिना धुले बर्तनों का ढेर इंतजार कर रहा होता है. कमरा भी साफ सफाई मांग रहा होता है. ये सब करने के बाद तैयारी होती है डिनर में फिश फ्राई जैसी कोई पसंदीदा डिश बनाने की. रविवार को बेशक छुट्टी होती है लेकिन इस दिन कपड़े धोने जैसे और कई कामों की लंबी लिस्ट होती है. डॉ अंजुता का दिन बेड पर छोटी प्रेयर के साथ होता है. इसमें वो जिनको कष्ट है, उनके कष्ट दूर होने की दुआ करती हैं. साथ ही वो अपने माता-पिता और करीबियों की सलामती भी मांगती हैं.
डॉक्टर बनने का क्यों देखा था सपना
अंजुता जब छोटी थीं तो मणिपुर में अपनी मां को हार्ट पेशेंट होने की वजह से छटपटाते देखना बर्दाश्त नहीं होता था. तभी अंजुता का सपना था कि डॉक्टर बनकर वो बीमारियों का अंधकार छांटने की कोशिश करेंगी. अब वो जब सपना पूरा हो गया है और मिशन में पूरे दिल से जुटीं डॉ अंजुता कहती हैं, “मुझे याद आता है कि मेरी मां बहुत कमजोर हुआ करती थीं. वो हमेशा चाहती थीं कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनूं. मुझे भी ये पसंद था. मैंने इसके लिए काफी मेहनत की और डॉक्टर बनने के सपने को पूरा किया.”
मणिपुर में घरवालों को बेटी पर गर्व
दिल्ली से मीलों दूर मणिपुर में डॉ अंजुता के घर पर उनकी मां, पिता, बहन और छोटी भांजी सभी को उन पर गर्व है. उनकी मां सोबिता कुमारी देवी कहती हैं, “मां के नाते मैं बेटी जहां है उससे बहुत खुश हूं. मेरी बेटी इस संकट के वक्त अपनी डॉक्टर की ड्यूटी को अंजाम दे रही है. जब भी उसे PPE किट में मरीजों को स्कैन करते देखती हूं तो थोड़ी फिक्र होती है.’’
माता-पिता के लिए युवा बेटी को लेकर ऐसी फिक्र होना स्वाभाविक है. डॉ अंजुता के पिता अशोक सिंह ने कहा, पिता के नाते मैं फिक्र करता हूं लेकिन साथ ही गर्व भी महसूस होता है कि बिटिया देश की सेवा कर रही है. मैं उसके मजबूत होने और सतर्क रहने के लिए प्रार्थना करता हूं. डॉ अंजुता की बहन सोनी बहन और भांजी प्रिज्ञांका भी उन्हें अपनी हेल्थ का खास ध्यान रखने के लिए कहती हैं. सोनी ने जहां अपनी बहन की मेहनत को सराहा वहीं प्रिज्ञाका ने कहा, ‘’चा (मासी) अपनी सेहत का ध्यान रखो, हम आपको मिस करते हैं. लव यू, हम Covid से लड़ेंगे.”

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