कोरोना कहर : दूर दराज के इलाके बहुत बडे खतरे में

इस्लाम हुसैन, काठगोदाम, नैनीताल से 

कोरोना वायरस से संक्रमित हुए मरीज (या वह संदिग्ध मरीज/व्यक्ति जो संक्रमित देश/विदेश में रहकर या वहां से यात्रा करके लौटे हैं) देश के गावों कस्बों में पहुंचकर जनता के लिऐ खतरा बन गए हैं। संक्रमित देशों  से आऐ लोगों से संक्रमित दिल्ली बम्बई जैसे महानगरों के प्रवासी करोना वायरस लेकर अपने गावों कस्बों में  लौट रहे है।

इस्लाम हुसेन

उत्तराखण्ड के कुमाऊं डिवीजन से मिली रिपोर्ट के अनुसार यहां अनेक केस आ चुके है। कनिका कपूर की  हंगामें से चर्चित हुए पूर्व सांसद अकबर अहमद डम्पी भी अपने घर किच्छा (उधमसिंह नगर) पहुंचे हैं जहां स्थानीय प्रशासन ने उन्हे क्वैरनटाइन में रख दिया है। अनेक केस स्थानीय अस्पतालों में दर्ज हो चुके हैं। उत्तराखण्ड की तराई के हालात बता रहे हैं कि जिस तरह से यहां प्रवासी देश विदेश हवाई अड्डों में बिना चैक हुए वापस लौट रहे हैं वह खतरनाक हो सकता है।
19 मार्च को प्रधानमंत्री जी ने टीवी पर आकर पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यू या जिसे योरोप में लाक डाउन कहा जाता है, करने की घोषणा की। इससे पहले सरकारी स्तर पर कोरोना वायरस से हो रही महामारी को रोकने के लिए कोई नीतिगत घोषणा नहीं की थी।
केरल जहां कोरोना का प्रभाव अपेक्षित अथिक था वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के अलावा अन्य किसी राज्य में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुए थे। जबकि केरल के बाहर मुम्बई और दिल्ली में में कोरोना के वायरस का असर दिख रहा था। मार्च के आरम्भ में ही इसके लक्षण दिखने लगे थे। और लोग इसके बारे में आशंका प्रकट करने लगे थे।
कोरोना बीमारी फैलने का अगर चार्ट देखें तो पाएंगे कि यह बीमारी हवाईअड्डों वाले शहरों में से आरम्भ हुई और वहीं से फैली। सभी संदिग्ध मरीज विदेश से आए, यदि बीमारी कि आहट सुनते ही हवाई अड्डों पर जांच की जाती तो यह हालत नहीं होती। दिल्ली बम्बई जैसे हवाई अड्डों की सिक्यूरिटी जांच से बचकर जब यात्री बाहर आ गए तो राज्य की राजधानियों व छोटे शहरों के हवाईअड्डों में जांच की क्या स्थिति होगी यह आसानी से समझा जा सकता है। इस तरह बीमारी में फैलती रही, और इसके साथ इसकी दहशत फैलती रही।
जनता कर्फ्यू की की घोषणा से पहले, व इस तरह की लाक डाउन की घोषणा की आशंका को “सूंघने वाले पढे लिखे” सुविधा सम्पन्न लोग पहले ही संक्रमित क्षेत्र छोडकर दूसरे सुरक्षित शहरों को निकल पडे थे। फिर जैसे ही यह घोषणा हुई की प्रधानमंत्री जी घोषणा करने वाले हैं ऐसे लोग भाग निकले, फिर जब घोषणा हो गई तो उसके कुछ घंटे बाद ही लोग सुरक्षित क्षेत्रों को भागने लगे।
इस ट्रेंड को जल्दी ही नोटिस किया गया लेकिन तब तक स्मार्ट लोग अपने अपने खोजे गए स्थानों की ओर निकल गए सबसे पहले हिमाचल सरकार ने इसे नोटिस करते हुए अपने राज्य में बाहरी लोगों/पर्यटकों का प्रवेश बंद कर दिया यह आदेश जारी होते होते शाम हो गई  तब तक बहुत लोग घुस चुके थे, इसलिए दिल्ली पंजाब से हिमाचल को जोडने वाली सडकों पर ट्रैफिक बेहद बढ गया शाम बैन होने की खबर जब पुलिस नाकों तक पहुंची तो नाके बंद होने लगे, कुल्लू मनाली रोहतांग दर्रे  व पार्वती वैली का प्रवेश द्वार भुन्तर का नाका जब बंद हुआ तो सैकडों वाहन फंस गए। लेकिन नाका बंद होने से पहले बहुत से लोग कुल्लू मनाली और आगे पहुंच चुके थे।
यही हाल उत्तराखण्ड का हुआ।
उत्तराखण्ड के अधिकारियों को अकल एक दिन बाद आई तब तक लोग बद्रीनाथ तक पहुंच गए थे। 19 की रात से 21 की शाम तक जब तक उत्तराखण्ड में टूरिस्ट इंट्री बैन का आर्डर निचले स्तर तक पहुंचा तब तक लोग बडी़ संख्या धडाधड घुस चुके थे। अब यहां सुनते हैं हर तरह की यात्रा पर बैन का आर्डर होने जा रहा है लेकिन जो होना था हो चुका। खतरा मुम्बई, दिल्ली से होता हुआ मनाली, रोहतांग बद्रीनाथ तक पहुंच चुका है।
उत्तराखण्ड के गांवो में एक अनुमान के अनुसार 1 लाख से अधिक प्रवासी शहरों से लौट चुके हैं, अब तो बाकायदा उत्तराखण्ड के सांसद दिल्ली में कैम्प करके प्रवासियों को पहाड भिजवा रहे हैं।
संक्रमित सुविधा सम्पन्न लोगों अथवा संक्रमित क्षेत्रों काम करने वाले प्रवासियों की गांव छोटो शहरों में इंट्री/ वापसी और फैलाव से, सबसे अधिक खतरा भी  छोटे शहरों और गांवों को होने की आशंका है। घनी आबादी और छोटे घरों के कारण यहां संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है। फिर छोटे शहरों/गांव में मेलजोल और सामाजिकता के कारण इसको फैलने में बहुत मदद मिलती है, और सबसे खतरनाक यह है कि ऐसे इलाकों में इलाज की छोटी भी सुविधाएं नहीं है।

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