केंद्र ने कोर्ट से कहा, ई-कॉमर्स वेबसाइट डिस्प्ले करें सामान पर देश का नाम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बिकने वाले सामानों का निर्माण करने वाले देश का नाम डिस्प्ले करना जरूरी है। केंद्र सरकार ने इस आशय का हलफनामा दिल्ली हाई कोर्ट में दिया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में दूसरे पक्षकारों को अपना जवाब 2 सितंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि पहले से जिन सामानों की पैकिंग की जा चुकी है, उनका निर्माण करने वाले देश का नाम डिस्प्ले करना जरूरी है। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि अगर कोई अपने देश में ही बनाई गई है तो उसमें उसका नाम प्रदर्शित करना जरूरी नहीं है। उपभोक्ता विभाग ने कहा कि इसके लिए उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों को पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना संकट के दौरान इस तरह का दिशा-निर्देश थोपना गैरजरूरी है, क्योंकि पहले से खराब हो चुकी अर्थव्यवस्था पर और बुरा असर पड़ेगा। इससे ई-कॉमर्स कंपनियों का व्यवसाय बुरे तरीके से प्रभावित होगा। इससे आम लोगों का भी व्यापक हित प्रभावित होने की आशंका है।
याचिका वकील अमित शुक्ला ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स में 2017 में बदलाव कर सामानों का निर्माण करनेवाले देश का नाम ई-कॉमर्स वेबसाइट को डिस्प्ले करना अनिवार्य है। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में अमेजन, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट समेत सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि आज जब देश की अधिकांश जनता केंद्र सरकार की अपील का पालन कर रही है और राष्ट्र को मजबूत करने के लिए भारतीय सामानों की खरीददारी कर रही है, ऐसे में ये जरूरी है कि ई-कॉमर्स वेबसाइट सामानों का निर्माण करनेवाले देश का नाम डिस्प्ले करें। याचिका में कहा गया है कि अगर ई-कॉमर्स कंपनियां सामानों का निर्माण करनेवाले देश का नाम डिस्प्ले नहीं करती हैं तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
याचिका में कहा गया है कि पिछले महीने ही वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आनेवाले गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने सभी विक्रेताओं के लिए सामानों का निर्माण करनेवाले देश का नाम डिस्प्ले करना अनिवार्य करने का आदेश दिया था। ये आदेश देश को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से किया गया था।

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