किसान क्रांंति यात्रा: किसानों के आगे झुकी सरकार,इन मुद्दों पर बनी सहमति

नई दिल्ली |
कर्जमाफी, बकाए गन्ने का भुगतान सहित अन्य मांगों को लेकर दिल्ली की दहलीज तक पहुंचे किसानों का प्रदर्शन समाप्त हो सकता है।गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर मंगलवार को सरकार और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में सात मुद्दों पर सहमति बन गई है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में दाखिल होने की कोशिश करने वाले किसानों को दिल्ली पुलिस ने राजधानी की सीमा गाजीपुर के पास रोका दिया था। किसानों ने अपनी यह ‘किसान क्रांति यात्रा’ 23 सितंबर को हरिद्वार से शुरू की थी।
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में किसानों के दाखिल होने से रोकने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी का बौछार किया। किसानों पर पुलिस की इस कार्रवाई ने विरोधी दलों को सरकार को घेरने का मौका दे दिया। कांग्रेस सहित दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सीताराम येचुरी ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए। वहीं, मामले को राजनीतिक रूप लेता देख सरकार हरकत में आ गई और उसने बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश की।
इन मुद्दों पर बनी सहमति

केंद्र सरकार ने एमएसपी निर्धारण के लिए कानून बनाने की मांग पर हामी भरी है।
कृषि एवं कृषि उत्‍पादों पर जीएसटी 5 फीसद करने पर रजामंदी हुई है।
सरकार ने एनजीटी के मुद्दे नई समिति बनाने का ऐलान किया है।
इंश्‍योरेंस बिल में संशोधन पर भी सहमति बनी है।
गन्‍ना किसानों की मुश्किलों को ध्यान में रखकर गन्ना मूल्‍य निर्धारण पर भी आम सहमति बन गई है।

‘किसान क्रांति यात्रा’ Updates
केंद्रीय कृषि राज्‍य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि गृह मंत्री राजनाथ ने किसानों के नेताओं से मुलाकात की है। उनकी मांगों पर चर्चा हुई है, जिसके बाद बड़े मुद्दों पर सहमति हो गई है। उन्‍होंने यह भी बताया कि किसान नेताओं के साथ यूपी के मंत्री लक्ष्‍मी नारायण, सुरेश राना और वह खुद भी अब किसानों से मिलेंगे।

जेडीयू नेता के सी त्‍यागी ने भी प्रदर्शनकारी किसानों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और पानी की बौछार किए जाने का विरोध किया है।
भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा कि उनके नेता राजनाथ सिंह से बात कर रहे हैं। किसान नेताओं से बातचीत के बाद ही अगले कदम के बारे में फैसला लिया जाएगा।
कांग्रेस ने किसानों के इस मार्च को अपना समर्थन दिया है। कांग्रेस ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा को किसानों के मार्च में शामिल होने के लिए कहा है।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार किसान-विरोधी है। यह सरकार किसानों को राहत देने की बजाय संकट को और बढ़ा रही है। आजादी के बाद किसानों में इतना बड़ा असंतोष हमने पहले कभी नहीं देखा है|
कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर भाजपा ने दिखा दिया है कि वह ब्रिटिश हुकूमत से कम नहीं है। मोदी सरकार किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़ रही है।
किसानों के समर्थन में आगे आते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आखिर उन्हें दिल्ली आने से क्यों रोका जा रहा है। किसानों को दिल्ली में दाखिल होने के लिए इजाजत दी जानी चाहिए। हम लोग किसानों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर एक शख्स को अपनी बात रखने का अधिकार है। ऐसे में किसानों को उपयुक्त फोरम पर बात रखने का अधिकार है|
भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं। उन्होंने 60 साल से अधिक उम्र वाले किसानों के लिए पेंशन योजना शुरू करने की भी मांग की है। इस बीच किसानों के इस विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

Source:टाइम्स नाउ हिंदी

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