काले रंग की वजह से इस एक्टर का उड़ता था मजाक, दोस्त कहते थे जल्लाद

जयपुर.लीडरशिप एंड पियर प्रेशर’ सब्जेक्ट पर सोमवार को बॉलीवुड एक्टर आशीष विद्यार्थी ने विचार रखे। वे फिक्की फ्लो जयपुर चैप्टर की ओर से होटल मेरिएट में आयोजित हुए कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे लिए मां का प्यार अहमियत रखता है। जानते हैं जब उनको संगीत नाट्य एकेडमी की ओर से 20 हजार रु. का पुरस्कार मिला तो उन्होंने मुझसे कहा कि इन पैसों से मुंबई जाकर अपने सपने को पूरा करो। हर इंसान को कुछ भी करने के लिए एक मोटिवेशन चाहिए होता है। जैसे मुझे मेरी मां का त्याग आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करता है। जल्लाद कहते थे दोस्त…

– आशीष ने बताया कि मेरी मां बंगाली हैं, लेकिन वो अजमेर में पली-बढ़ी हैं। उनका मुझ पर बहुत प्रभाव है। यही वजह है कि किसी की कोई भी ऐसी बात जो मुझे सिर्फ कमतर दिखाने के लिए बोली गई हो, मुझ पर असर नहीं करती।
– मुझे याद है जब दिल्ली में पढ़ रहा था तो लोग मेरे रंग के कारण कल्लू बोलते थे।
– मेरा दोस्त तो दूर से ही चिल्लाता था और जल्लाद कैसे हो। ये बातें पहले मेरे दिल में तीर की तरह लगती थीं, लेकिन अब नहीं।
– मुझे याद है जब दिल्ली में पढ़ रहा था तो लोग मेरे रंग के कारण कल्लू बोलते थे।
– मेरा दोस्त तो दूर से ही चिल्लाता था और जल्लाद कैसे हो। ये बातें पहले मेरे दिल में तीर की तरह लगती थीं, लेकिन अब नहीं।
किसी के जैसे बनना सबसे बड़ा लूजर होना
– सबसे बड़ा रोग है किसी के जैसे बनने की कोशिश। यही सोच उस यूनिक पर्सन को बाहर नहीं आने देती जो दुनिया के लिए एक खूबसूरत गिफ्ट हो सकता था। किसी के जैसा बनना सबसे बड़ा लूजर होना है।
– आपके अपने हाथ में है खुद को हीरे की तरह तराशना। अपने हर फेसिट को दुनिया के सामने लाना। खुद को इग्नोर करें बल्कि खुद से रोज बात कीजिए, मुलाकात कीजिए।
– कई फिल्मी सितारे काला चश्मा लगाकर घूमते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनसे लोग कुछ पूछ लें। इस मायने में रजनीकांत अपनी जिंदगी को सही तरह से जी रहे हैं। कोई दिखावा नहीं।
– फिल्म शूटिंग होने के बाद विग तक उतार देते हैं। बिना इस बात की परवाह किए कि लोग क्या कहेंगे।
– सबसे बड़ा रोग है किसी के जैसे बनने की कोशिश। यही सोच उस यूनिक पर्सन को बाहर नहीं आने देती जो दुनिया के लिए एक खूबसूरत गिफ्ट हो सकता था। किसी के जैसा बनना सबसे बड़ा लूजर होना है।
– आपके अपने हाथ में है खुद को हीरे की तरह तराशना। अपने हर फेसिट को दुनिया के सामने लाना। खुद को इग्नोर करें बल्कि खुद से रोज बात कीजिए, मुलाकात कीजिए।
– कई फिल्मी सितारे काला चश्मा लगाकर घूमते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनसे लोग कुछ पूछ लें। इस मायने में रजनीकांत अपनी जिंदगी को सही तरह से जी रहे हैं। कोई दिखावा नहीं।
– फिल्म शूटिंग होने के बाद विग तक उतार देते हैं। बिना इस बात की परवाह किए कि लोग क्या कहेंगे।





