कामदा एकादशी पर बन रहा धृति योग, जानें अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय

आज यानी 29 मार्च को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2026) व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
इस बार कामदा एकादशी पर कई मंगलकारी योग भी बन रहे हैं। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल (Aaj ka Panchang 29 March 2026) का समय समेत आदि जानकारी।
तिथि: शुक्ल एकादशी
मास: चैत्र
दिन: रविवार
संवत्: 2083
तिथि: शुक्ल एकादशी – प्रातः 07 बजकर 46 मिनट तक, फिर द्वादशी
योग: धृति – सायं 06 बजकर 37 मिनट तक
करण: विष्टि – प्रातः 07 बजकर 46 मिनट तक
करण: बव – सायं 07 बजकर 25 मिनट तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 18 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 37 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: दोपहर 03 बजकर 15 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: प्रातः 04 बजकर 29 मिनट (30 मार्च)
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: कर्क राशि में
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 01 बजकर 02 मिनट से दोपहर 02 बजकर 38 मिनट तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: सायं 05 बजकर 04 मिनट से सायं 06 बजकर 37 मिनट तक
गुलिकाल: सायं 03 बजकर 32 मिनट से सायं 05 बजकर 04 मिनट तक
यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से दोपहर 01 बजकर 59 मिनट तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से सायं 03 बजकर 31 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 23 मिनट से प्रातः 10 बजकर 55 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 06 बजकर 18 मिनट से प्रातः 07 बजकर 50 मिनट तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
आश्लेषा नक्षत्र: सायं 02 बजकर 38 मिनट तक
स्थान: 16°40’ कर्क राशि से 30°00’ कर्क राशि तक
नक्षत्र स्वामी: बुधदेव
राशि स्वामी: चंद्रदेव
देवता: नाग (सर्प देवता)
प्रतीक: कुंडली मार कर बैठा हुआ सर्प
सामान्य विशेषताएं: मजबूत कद-काठी, खुशमिजाज व्यक्तित्व, जीवन के प्रति उत्साह, कुशाग्र बुद्धि, तीव्र स्मरण शक्ति, चतुर, यात्रा प्रेमी, प्रभावशाली वक्ता और रहस्यमयी।
कामदा एकादशी 2026
एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च, 2026 को सुबह 08 बजकर 45 मिनट तक
एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च, 2026 को सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक
पारण का समय (30 मार्च): सुबह 06:14 से 07 बजकर 09 मिनट तक
द्वादशी तिथि समाप्ति (पारण के दिन): सुबह 07 बजकर 09 मिनट तक
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के बाद आने वाली पहली एकादशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। यहां तक कि शास्त्रों में इसे अत्यंत कठिन पापों से मुक्ति दिलाने वाला भी बताया गया है। इस दिन गंधर्व ललित और ललिता की कथा का श्रवण करना विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत के समापन यानी पारण के लिए अगले दिन सूर्योदय के पश्चात का समय निर्धारित है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही व्रत खोल लिया जाए। पारण के लिए ‘हरि वासर’ की अवधि बीतने का इंतजार करना चाहिए, जो द्वादशी का शुरुआती चौथाई भाग होता है। सुबह का समय पारण के लिए सबसे उत्तम है; दोपहर में व्रत खोलने से बचना चाहिए।
गृहस्थों के लिए पहले दिन का उपवास सुझाया गया है, जबकि सन्यासियों और मोक्ष की इच्छा रखने वालों के लिए दूसरे दिन की एकादशी का विधान है। भगवान विष्णु के अनन्य भक्त अपनी अपार श्रद्धा और सहजता के साथ इस व्रत को पूर्ण करते हैं।





