कांग्रेस में अध्‍यक्ष पद पर दो फाड़, एक तरफ ‘गांधी’ तो वहीं दूसरी तरफ खड़े हुए ‘बागी’

नई दिल्‍ली। कांग्रेस पार्टी में इस समय कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल पार्टी के अंदर ही दिग्‍गज नेताओं के बीच में पार्टी नेतृत्‍व को लेकर ही बागी तेवर दिखने शुरू हो गए हैं। वहीं इसके बाद सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफे की पेशकश की और साथ में ही उस चिट्ठी का भी जवाब दिया जिसमें नेतृत्‍व पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद कांग्रेस समिति दो भागों में बंट गई।

जहां एक ओर गांधी परिवार के समर्थन में लोग दिखे तो वहीं दूसरी तरफ बागी नेताओं ने भी अपने सख्‍त तेवर दिखाए। बता दें कि सोनिया को लिखे गए पत्र में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, शशि थरूर, जितिन प्रसाद, मुकुल वासनिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मिलिंद देवड़ा, रेणुका चौधरी, अखिलेश प्रसाद, पीजे कुरियन, संदीप दीक्षित, टीके सिंह, कुलदीप शर्मा, विवेक तन्खा, पृथ्वीराज चव्हाण, मनीष तिवारी और अरविंदर सिंह लवली जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम हैं, जो पार्टी नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं।

दरअसल यह पूरा मामला आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी के ‘कुछ कांग्रेस नेताओं की बीजेपी से सांठ गांठ’ वाले बयान के बाद खड़ा हो गया। हालांकि बाद में पार्टी की तरफ से यह भी कहा गया कि राहुल गांधी ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। इस संदर्भ में कोई बात नहीं हुई। कांग्रेस का ये बयान ऐसे समय पर आया, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल राहुल के बयान को लेकर भड़क चुके थे।

एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व के मुद्दे पर दो खेमे में बंटी नजर आ रही है। सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस समय नया सियासी बवाल खड़ा हो गया जब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद सहित 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा। इस पत्र में कांग्रेस नेताओं ने सोनिया से पूर्णकालिक और जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग की थी। वहीं इसके बाद खबर आई कि सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। वहीं दूसरी तरफ इस पत्र की खबर सामने आने के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ और युवा नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि गांधी-नेहरू परिवार ही पार्टी को एकजुट रख सकता है। कांग्रेस की कई प्रदेश इकाइयों के अध्यक्षों और सांसदों ने भी सोनिया गांधी को पत्र लिखकर उनके और राहुल गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया।

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