कांग्रेस ने की केंद्र सरकार से मांग, राज्यों के बकाए जीएसटी मुआवजे का जल्द हो भुगतान

नई दिल्ली। कोरोना संकट और आर्थिक मंदी की वजह से देश में हर ओर समस्याएं हैं। देश के सभी राज्यों में लोग आर्थिक पहलू को लेकर परेशान हो रहे हैं। इसी बात को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि अगर कोरोना एवं अन्य प्राकृतिक समस्याओं से लोगों को उबारने के लिए राज्यों को केंद्र की मदद नहीं मिलेगी तो कैसे काम चलेगा।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाने के लहजे में कहा कि राज्य की मदद तो दूर केंद्र को उनके बकाए जीएसटी के पैसे तक देने को तैयार नहीं है। पिछले कई महीनों से राज्यों को उनका जीएसटी मुआवजा नहीं मिला है, जिससे स्थितियां और बिगड़ रही हैं। इन हालातों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी केंद्र से मांग करती है कि राज्यों के बकाये जीएसटी मुआवजे का तत्काल भुगतान किया जाए।

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, कांग्रेस प्रवक्ता राजीव गौड़ा और कर्नाटक से कांग्रेस विधायक कृष्ण बायरे गौड़ा ने मंगलवार को पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यों को आर्थिक मदद की जरूरत है। मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि बुनियादी तौर पर भाजपा सरकार ने यह वादा किया था कि वो भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देंगे। लेकिन आज अर्थव्यवस्था अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर है। उन्होंने कहा कि अब तो सरकार का यह वादा सिर्फ खेल बनकर रह गया है। अपने सभी वादों की तरह केंद्र का जीएसटी भुगतान का वादा भी अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे छोटे राज्य का भी सरकार पर 4400 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि राज्य के लिए कुल वेतन बिल भी 1800 करोड़ रुपये है। ऐसे में हमारे लिए राज्य चलाना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरीके से भाजपा सरकार हर व्यवस्था को तोड़ने-मरोड़ने में लगी है, उससे कहा जा सकता है कि इस सरकार की नजर में भारतीय संविधान, संस्थान या फिर देशवासियों के लिए कोई सम्मान नहीं है।

राज्यों की मदद से पल्ला झाड़ने को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए मनप्रीत बादल ने कहा कि जब भी केंद्र से पूछा गया कि कोविड से कैसे निपटा जाए तो राज्यों को और अधिक उधार लेने की सलाह दी गई। आखिर यह किस प्रकार की मदद है और सरकार इसे कैसे प्रतिबद्धता के तौर पर देखती है। उन्होंने कहा कि आज सभी राज्य वित्तीय रूप से परेशानी झेल रहे हैं, इस परिस्थिति में मोदी सरकार संसदीय स्थायी समिति को सूचित करती है कि उसके पास 14 प्रतिशत जीएसटी मुआवजे का भुगतान करने के लिए धन नहीं है। जबकि राज्यों को इस राशि का भुगतान वैधानिक रूप से अनिवार्य है। इतना ही नहीं, अटॉर्नी जनरल कहते हैं कि मुआवजे का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार बाध्य नहीं है, जबकि माल और सेवा (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम 2017 में स्पष्ट तौर पर इसे अनिवार्य बताया गया था।

वहीं कर्नाटक से कांग्रेस विधायक कृष्णा गौड़ा ने कहा कि लोगों की आजीविका और उनकी जीविका का ध्यान रखने के मामले में राज्य सरकार सबसे आगे खड़ी होकर काम करती है। उस पर महामारी की स्थिति में लोगों को मदद पहुंचाने की दिशा में राज्यों के वित्तीय संकट की प्रकृति और पैमाने अभूतपूर्व हैं। उन्होंने कहा कि मुआवजा एक सहमति कानून है, जिसे निर्धारित किया गया है। केंद्र पर कर्नाटक जैसे राज्य का 13 हजार करोड़ रुपये का बकाया है। ऐसी स्थिति में बाढ़, बाढ़ से बर्बाद फसलों, मवेशियों एवं जीवन के संकट से लोगों को उबारने के लिए राज्य को आर्थिक मदद की जरूरत है।

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव गौड़ा ने कहा कि जीएसटी मुआवजा अधिनियम कहता है कि 5 वर्षों के लिए 14 प्रतिशत के हिसाब से जीएसटी राजस्व का विकास होता है तो राज्यों को मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में अच्छे समय मे केंद्र सरकार ने राजस्व में 88 हजार करोड़ रुपये बनाए। अब जब समय कठिन है तो जरूरी है कि केंद्र राज्यों को मुआवजा दे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर केंद्र अपने वादे का सम्मान नहीं करता है, तो वे किस आधार पर सहकारी संघवाद का ढोल पीटते हैं।

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