कांग्रेस का हाथ छोड़ने के बाद ये करने को मजबूर मायावती

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बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के दिग्विजय सिंह को बीजेपी और आरएसएस का एजेंट करार देने वाले बयान के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन जहां खटाई में पड़ गया है, वहीं राजस्थान में पार्टी नई संभावनाएं तलाशने में जुट गई है। बीएसपी नेता लोकतांत्रिक मोर्चा के संपर्क में हैं।
मायावती ने कांग्रेस को दिया झटका, CG में जोगी संग किया गठबंध

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दरअसल बीएसपी का नया प्लान लोकतांत्रिक मोर्चे के साथ राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में उतरना हो सकता है। बसपा के प्रदेश प्रभारी मुनकाद अली ने कहा है कि लोकतांत्रिक मोर्चा के दलों के साथ बात चल रही है। अगर बीएसपी और लोकतांत्रिक दलों का गठबंधन होता तो प्रदेश की करीब 50 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के समीकरण बिगड़ सकते हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हाेने की आशंका जताई जा रही है।
गठबंधन तभी होगा जब हमें सम्मानजनक सीटें मिलेंगी: मायावती

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बता दें, राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही मोर्चों का गठन होना शुरू हो चुका है और इसकी विधिवत शुरुआत हाल ही वामंपथी और समाजवादी दलों ने की है। वामपंथी और समाजवादी दलों ने मिलकर लोकतांत्रिक मोर्चा बनाया है। लोकतांत्रिक मोर्चे के सम्मेलन में जेडीएस, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई माले, सीपीआई माले (एल), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। इन सभी सात दलों ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया। लोकतांत्रिक मोर्चे में अभी और भी दल शामिल हो सकते हैं।
भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी और खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल भी एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले हैं। संभावनाएं ये भी जताई जा रही हैं कि भारत वाहिनी और बेनीवाल भी लोकतांत्रिक मोर्चे में शामिल हो सकते हैं।

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