कर्फ्यू नहीं है लॉक डाउन

शबाहत हुसैन विजेता
कोरोना की वजह से पूरे देश में लॉक डाउन चल रहा है। लॉक डाउन का मतलब लोगों ने अघोषित कर्फ्यू समझ लिया है। यही वजह है कि गलियों में रहने वाले लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं और गलियों में बेवजह आवाजाही बनी हुई है। जिन गलियों में राशन की दुकानें हैं वहां पर आम दिनों की तरह से भीड़ लगी है। यह भीड़ किसके लिए ख़तरा बन जायेगी इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
कोरोना संक्रामक बीमारी है। यह एक व्यक्ति से दूसरे में ट्रांसफर होती है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने वाले को संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि सरकार को लॉक डाउन का फैसला लेना पड़ा। लॉक डाउन कर्फ्यू नहीं कर्फ्यू जैसा है। लॉक डाउन लोगों को करीब आने से रोकने के लिए है। यह व्यवस्था संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को दूर रखने के लिए है।

भारत में 22 मार्च को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार 14 घंटे का लॉक डाउन घोषित किया था। बाद में इसी लॉक डाउन को पहले 25 मार्च तक और बाद में बढाकर 21 दिन का कर दिया गया। प्रधानमन्त्री ने जैसे ही लॉक डाउन को 21 दिन तक बढ़ाने का फैसला किया लोग प्रधानमन्त्री का संबोधन छोड़कर झोला लेकर दुकानों की तरफ दौड़ पड़े।

दुकानों पर बेहिसाब लोग उमड़ आये। सड़कों पर इतनी भीड़ अचानक से उमड़ी कि दो दिन से लोगों को दूर-दूर रखने के लिए की गई सारी मेहनत पर पानी फिर गया।
इस लॉक डाउन ने मुख्य सड़कों पर ज़रूर सन्नाटा कर दिया है लेकिन गलियों में हालात सामान्य जैसे हैं। लोग आराम से टहल रहे हैं। जहाँ पर पुलिस मौजूद है वहां कुछ देर को लोग घर की तरफ भागते हैं लेकिन कुछ ही देर में दोबारा वहीं आकर खड़े हो जाते हैं। गलियों में लगी यह भीड़ इस महामारी के मद्देनज़र कितनी खतरनाक है इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं है।
राशन की दुकानों पर, किराना की दुकानों पर, दूध की दुकानों पर और सब्जी की दुकानों पर जिस तरह से भीड़ उमड़ रही है वह कोरोना के चक्र को तोड़ने में नाकाम साबित हो सकती है। दिल्ली में खुली दुकानों के बाहर सामान खरीदने वालों के लिए चूना डालकर अलग-अलग घेरे बनाये गए हैं ताकि लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी बनी रहे लेकिन बाकी जगहों पर इस दूरी की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
कोरोना को हराने के लिए जिस तरह से पूरी दुनिया में तैयारियां चल रही हैं उसमें सोशल डिस्टेंस बनाने को ही सबसे आसान तरीका माना गया है। कई देशों ने अपने यहाँ लॉक डाउन कर भी दिया है। भारत में यह बीमारी देर से आयी है। इसलिए उसके पास उन देशों के उपायों से सीखने का सुनहरा मौका है जिन्होंने इस संक्रमण की वजह से अपने बेहिसाब नागरिकों को खो दिया है। भारत ने शुरू से ही लॉक डाउन और आइसोलेशन की तकनीक को अपनाया है।
सरकार ने लॉक डाउन का फैसला सुना दिया है। यह लोगों के लिए सबसे ज़रूरी फैसला है। लॉक डाउन का सख्ती से पालन किया गया तो कोरोना को कम वक्त में हराया जा सकता है। यह सभी की सुरक्षा का मामला है। जितनी जल्दी यह बात सबकी समझ में आ जाए वह बेहतर होगा। गलियों में भी लोगों को खुद से लॉक डाउन का पालन करना होगा। लोग इस बात को समझें कि यह कर्फ्यू नहीं बीमारी को आने से रोकने का तरीका है।

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