कढ़ा प्रसाद से लेकर केसरी चावल तक: बैसाखी पर घर लाएं पंजाब का असली स्वाद

बैसाखी का त्योहार पंजाब और हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत में बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार रबी की फसल कटने की खुशी का प्रतीक है, जिसे बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 अप्रैल को मनाया जाएगा।

खुशियों के इस पर्व पर जब तक थाली में पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद न हो, जश्न अधूरा लगता है। अगर आप इस बैसाखी अपने घर पर खास दावत की योजना बना रहे हैं, तो ये 5 पारंपरिक डिशेज आपकी बैसाखी सेलिब्रेशन में चार चांद लगा देंगी।

कढ़ा प्रसाद
कढ़ा प्रसाद श्रद्धा का प्रतीक है। इसलिए गुरुद्वारे में या घर पर भोग लगाने के लिए इसे बनाया जाता है। इसे गेहूं के आटे, देसी घी और चीनी के बराबर अनुपात से बनाया जाता है। धीमी आंच पर आटे को तब तक भुना जाता है जब तक कि वह सुनहरा भूरा न हो जाए और घी न छोड़ने लगे। इसकी खुशबू ही मन को सुकून देने वाली होती है।

केसरी चावल
पीला रंग वसंत और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए बैसाखी पर मीठे चावल या केसरी चावल बनाने की परंपरा है। लंबे दाने वाले बासमती चावल को केसर, इलायची, लौंग और दालचीनी के साथ पकाया जाता है। इसमें ढेर सारे सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम और किशमिश डाले जाते हैं, जो इसे एक रॉयल स्वाद देते हैं।

पंजाबी कढ़ी पकौड़ा
उत्तर भारतीय घरों में किसी भी शुभ अवसर पर कढ़ी बनने का महत्व है। पंजाबी कढ़ी अपनी खटास और गाढ़ेपन के लिए मशहूर है। बेसन के नरम और फूले हुए पकौड़े जब दही वाली कढ़ी में जाते हैं, तो वे सारा स्वाद सोख लेते हैं। लास्ट में सूखी लाल मिर्च, कसूरी मेथी और हींग का तड़का इसके स्वाद को दोगुना कर देता है। इसे गरमा-गरम चावल के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है।

मक्के की रोटी और सरसों का साग
हालांकि, यह मुख्य रूप से सर्दियों का व्यंजन है, लेकिन बैसाखी के अवसर पर इस डिश को बनाने से त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है। सरसों के पत्तों के साथ पालक और बथुआ मिलाकर बनाया गया साग, जिसमें लहसुन का भरपूर तड़का लगा हो। मक्के के आटे की गरमा-गरम रोटी पर सफेद मक्खन और साथ में गुड़ का एक टुकड़ा इसे और स्वादिष्ट बनाता है।

फिरनी
बिना मीठे के त्योहार अधूरा-अधूरा सा लगता है। बैसाखी पर मीठे के लिए फिरनी काफी बेहतर ऑप्शन है। यह खीर से थोड़ी अलग होती है, क्योंकि इसमें चावल को दरदरा पीसकर दूध के साथ गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे मिट्टी के बर्तन में जमाया जाता है, जिससे इसमें सौंधी खुशबू आती है। ऊपर से पिस्ता और चांदी का वर्क इसे देखने में भी लाजवाब बनाता है।

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