कच्चे तेल कंपनियों होगी बल्ले-बल्ले, एनर्जी इन्फ्रास्टकचर पर हमले के बाद इन्हें मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

खाड़ी देशों में एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद कीमतों में बढ़ोतरी से अपेस्ट्रीम ऑयल और सर्विस कंपनियों को फायदा हो सकता है। वहीं, डाउनस्ट्रीम और अंतिम उपभोक्ता इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों का मतलब कच्चे तेल का उत्पादन करने वाली इकाइयों से है। वहीं, डाउनस्ट्रीम ऑयल कंपनियों का मतलब वितरक इकाइयों से है।

सिस्टमेटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में ऊर्जा की कीमतें में वृद्धि और आपूर्ति में रुकावट को लेकर चेतावनी दी गई है, जिसका ऊर्जा आयातक देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति को बहाल करने और पुनः शुरू करने में लंबा समय लग सकता है, जिससे इस क्षेत्र को लंबी अवधि में नुकसान होगा।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का कच्चे तेल का आयात घटकर 1.9 मिलियन बेरल रह गया, जबकि फरवरी 2026 में यह लगभग 25 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के साप्ताहिक निर्यात की मात्रा 7 मार्च को समाप्त सप्ताह में घटकर 228 मिलियन बेरल और 14 मार्च को समाप्त सप्ताह में 184 मिलियन बेरल रह गई, जो फरवरी 2026 में लगभग 268 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह थी।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के साप्ताहिक निर्यात की मात्रा 7 मार्च को समाप्त सप्ताह में घटकर 228 मिलियन बेरल और 14 मार्च को समाप्त सप्ताह में 184 मिलियन बैरल रह गई, जो फरवरी 2026 में लगभग 268 मिलियन बेरल प्रति सप्ताह थी।

सऊदी अरब से कच्चे तेल का निर्यात मार्च के पहले और दूसरे सप्ताह में क्रमशः 26 मिलियन बेरल और 12 मिलियन बेरल रहा, जबकि फरवरी में यह औसतन 42 मिलियन और 33 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था।

इराक और संयुक्त अरब अमीरात के निर्यात में भी भारी गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिका से निर्यात बढ़कर 25 मिलियन और 32 मिलियन बेरल हो गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि बाकी देशों के निर्यात में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

इसमें आगे कहा गया है कि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे प्रमुख आयातकों से एलएनजी की मात्रा में भी भारी गिरावट आई है, जिसके कारण हाल के हफ्तों में कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है ओर यह 10 डॉलर/मिमीबीटीयू से बढ़कर लगभग 20 डॉलर मिमीबीटीयू हो गई है।

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