एक बार फिर थम गए हरियाणा रोडवेज के पहिए, यात्री भुगत रहें परेशानी

हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों ने आज पूरे प्रदेश में चक्का जाम कर दिया है। बसों के नहीं चलने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर, ताजा मिली जानकारी के अनुसार रोडवेज की यह हड़ताल खत्म कराने की कवायद शुरू हो गई है। सरकार ने बातचीत के लिए रोडवेज कर्मचारी नेताओं को बुलाया है। आज दोपहर बाद 3 बजे हरियाणा निवास में सरकार और रोडवेज कर्मचारी नेताओं की बैठक होगी। इस बैठक में परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार खुद भी मौजूद रहेंगे।
एक बार फिर थम गए हरियाणा रोडवेज के पहिए, यात्री भुगत रहें परेशानी
 
बता दें कि यह चक्का जाम फिलहाल एक दिन का ही रहेगा। मंगलवार को फिर से  सभी 8 यूनियनों की मीटिंग होगी। जिसमें आगे की रणनीति का एलान किया जाएगा। यूनियनों ने कहा है कि सरकार बातचीत का न्यौता देने से पहले सोच ले। उसे समझौता लागू करना है या नहीं। सरकार बार-बार समझौता तोड़कर हमें हड़ताल, चक्का जाम करने के लिए मजबूर करती है। 

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रोडवेज कर्मचारी नेता दलबीर किरमारा एवं रमेश सैनी ने कहा कि मंगलवार के चक्का जाम के बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुली तो ज्वाइंट एक्शन कमेटी आगामी रणनीति तय करेगी। जिसमें 18 जून को परिवहन मंत्री के कैंप कार्यालय का घेराव व 9 जुलाई को करनाल में सीएम के कैंप कार्यालय का घेराव करेंगे।

पिछले तीन सालों में रोडवेज बेड़े में घटी हैं बसें 

ट्रेन का विकल्प अपनाएं            
अगर मंगलवार के दिन घर से यात्रा की मजबूरी हो तो ट्रेन का विकल्प अपना सकते हैं। बसों की हड़ताल के कारण यहां भी भीड़ अधिक रहेगी। फिर भी आप अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन का टाइम शेडयूल जानकर कार्यक्रम बना सकते हैं।

प्राइवेट बसें, ओमनी और क्रूजर के भरोसे होंगे यात्री 
रोडवेज बसें नहीं चलने से यात्री कुछ प्राइवेट बसों को सहारे ही सफर करने पर मजबूर होंगे। ये बसें डिपो परिसर में नहीं आकर बस अड्डे के बाहर और बहुअकबरपुर बाइपास से निकलेंगी। इसके अलावा दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों सोनीपत, जींद, गोहाना, सांपला और झज्जर के लिए ओमनी और क्रूजर यात्रियों का सहारा बनेंगे।

पिछले तीन सालों में रोडवेज बेड़े में घटी हैं बसें 
इंटक यूनियन के महासचिव महावीर मलिक ने बताया कि सरकार प्राइवेट बसों को चलाने पर आमादा है। जींद, हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे डिपो में नई नीति के तहत प्राइवेट बस चलाए जाने से कर्मचारियों में रोष है। प्रदेश सरकार के सत्ता में आने के बाद रोडवेज के बेड़े में बसें बढ़ने के बजाय घटी हैं। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बसों की परमिट नीति आमजन के खिलाफ है। 

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