ईरान युद्ध में नया मोड़, जमीनी कार्रवाई की तैयारी; ट्रंप ने परमाणु सामग्री पर दिए बड़े संकेत

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। संघर्ष के नौवें दिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और इस्राइल अब ईरान के भीतर जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी परमाणु सामग्री की सुरक्षा का हवाला देते हुए जरूरत पड़ने पर विशेष सैन्य बल भेजने के संकेत दिए हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इस्राइल को ईरान के परमाणु भंडार को लेकर गंभीर चिंता है। माना जा रहा है कि ईरान के पास संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार मौजूद है। दोनों देशों की योजना है कि जरूरत पड़ने पर विशेष सैन्य बलों के जरिए इस परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लिया जाए। इसी कारण ईरान में संभावित जमीनी अभियान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जमीनी कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
रविवार को एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान में जमीनी कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया। ट्रंप ने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि परमाणु सामग्री की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात की मांग हुई तो अमेरिका अपने विशेष बलों का इस्तेमाल कर सकता है।
ईरान ने अमेरिका और इस्राइल को क्या चेतावनी दी?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अली अराघची ने कहा कि यदि अमेरिकी या इस्राइली सेना ने ईरान की जमीन पर कदम रखा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और देश में घुसने वाले किसी भी दुश्मन का मुकाबला किया जाएगा। अराघची ने दावा किया कि ईरान के सैनिक अपनी जमीन की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।
क्या युद्धविराम की कोई संभावना है?
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका और इस्राइल फिर से युद्धविराम की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। उनके अनुसार जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ईरान का कहना है कि वह अपने लोगों और अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।
पड़ोसी देशों पर हमलों को लेकर ईरान का क्या तर्क है?
ईरान के विदेश मंत्री ने पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइलें सीधे अमेरिका तक नहीं पहुंच सकतीं, इसलिए पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि वह पड़ोसी देशों को और अधिक निशाना बनाने से बचने की कोशिश करेगा।
पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जा सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और इस्राइल ने ईरान में जमीनी कार्रवाई की, तो यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।





