इस मंदिर में छप्पन भोग नहीं, बल्कि एक साधारण ‘लौकी’ से प्रसन्न होते हैं भगवान

जिस तरह महादेव को कच्चा दूध और भगवान गणेश को लड्डू प्रिय हैं, वैसे ही आंध्र प्रदेश के एक अनोखे मंदिर में एक बेहद साधारण चीज चढ़ाई जाती है। जी हां, लौकी! इस पवित्र जगह का नाम है ‘श्री सोरकायाला स्वामी मंदिर’, जहां की परंपराएं आपको हैरान भी करेंगी और मन को शांति भी देंगी।
1875 का वो महान संत, जिसके पास थी हर मर्ज की दवा
यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पुत्तूर के करीब ‘नारायणवरम’ में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर ईश्वरीय शक्ति ने अवधूत का रूप लिया था। श्री सोरकाया स्वामी, जिनका जन्म 1875 के आसपास हुआ था, नारायणवरम के ही अवधूत थे। वह दिखने में बहुत ही साधारण थे, लेकिन उनके पास अपार ज्ञान था। स्थानीय लोग उन्हें एक चमत्कारी संत मानते थे जो नीम की पत्तियों, हल्दी पाउडर और जड़ी-बूटियों की मदद से लोगों की बीमारियों, नकारात्मक ऊर्जा और काले जादू के प्रभाव को दूर कर देते थे।
क्या है ‘लौकी’ चढ़ाने का रहस्य?
तेलुगु भाषा में ‘सोरकाया’ का मतलब ‘लौकी’ होता है। मान्यता है कि स्वामी जी जहां भी जाते थे, हमेशा अपने साथ एक लौकी रखते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन अत्यधिक सादगी और सेवा में बिता दिया। वह अपने लिए नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों का पेट भरने के लिए भिक्षा मांगते थे, और अपने इस सन्यासी जीवन में उसी साधारण लौकी का इस्तेमाल करते थे।
सच्ची श्रद्धा का प्रतीक
समय के साथ, भक्तों ने स्वामी जी के त्याग, करुणा और उनकी आध्यात्मिक शक्ति को सम्मान देने के लिए इस मंदिर में लौकी चढ़ाना शुरू कर दिया। आज जब आप इस पवित्र जगह पर जाएंगे, तो आपको मंदिर की छत, दीवारों और रेलिंग से अनगिनत लौकियां लटकती हुई दिखाई देंगी। यह इस बात का एक खूबसूरत सबूत है कि सच्ची आस्था के लिए किसी भी तरह के खर्चीले चढ़ावे की जरूरत नहीं होती। माना जाता है कि इस मंदिर के दर्शन करने से शरीर से नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और मन को गहरी आध्यात्मिक शांति मिलती है।
कैसे पहुंचें?
अगर आप इस आध्यात्मिक जगह के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है:
दूरी: यह मंदिर तिरुपति से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं, बेंगलुरु से इसकी दूरी 250 किलोमीटर और हैदराबाद से 585 किलोमीटर से थोड़ी कम है।
नजदीकी शहर: मंदिर के सबसे करीब पुत्तूर है, जो यहां से सिर्फ 4.8 किलोमीटर दूर है।
यात्रा का तरीका: यहां पहुंचने का सबसे सही तरीका है कि आप बस, ट्रेन या फ्लाइट के जरिए तिरुपति पहुंचें। तिरुपति से आप बस या टैक्सी लेकर सड़क मार्ग के जरिए आसानी से नारायणवरम पहुंच सकते हैं।





