इस्तांबुल की नीली मस्जिद पहुंचे पोप लिओ, झुककर प्रकट किया सम्मान

पोप लिओ इस्तांबुल की नीली मस्जिद पहुंचे और झुककर सम्मान प्रदर्शित किया। इस दौरे का उद्देश्य धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना था। मस्जिद में प्रवेश करते ही उन्होंने झुककर सम्मान व्यक्त किया, जो विभिन्न धर्मों के बीच समझ और शांति का प्रतीक है। पोप लिओ ने दुनिया भर में धार्मिक सद्भाव और सहिष्णुता का संदेश दिया।

पोप लिओ शनिवार को इस्तांबुल की नीली मस्जिद पहुंचे। उन्होंने मस्जिद में प्रवेश करने से पहले थोड़ा झुककर सम्मान प्रकट किया। अपने जूते भी उतारे, लेकिन मस्जिद में इबादत नहीं की। पोप लिओ अपनी पहली विदेश यात्रा पर गुरुवार को तुर्किये पहुंचे हैं।

पोप नीली मस्जिद में लगभग 20 मिनट रहे। मस्जिद के इमाम और इस्तांबुल के मुफ्ती ने उन्हें मस्जिद परिसर दिखाया। नीली मस्जिद का नाम सुल्तान अहमद ढ्ढ के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इस मस्जिद के निर्माण की देखरेख की थी। इसमें हजारों नीले सिरेमिक टाइलें लगे हैं। इसलिए इसका नाम नीली मस्जिद है।

17वीं सदी की यह मस्जिद हागिया सोफिया के पास है। पोप ने हागिया सोफिया का दौरा नहीं किया। हागिया सोफिया, लगभग एक सहस्त्राब्दी तक सबसे महत्वपूर्ण गिरजाघरों में से एक था, लेकिन बाइजेंटाइन साम्राज्य के पतन के बाद इसे मस्जिद बना दिया गया।

इसे 70 साल से अधिक समय पहले संग्रहालय में परिवर्तित किया गया, लेकिन 2020 में इसे फिर से मस्जिद बना दिया गया। गौरतलब है कि पोप फ्रांसिस 2014 में तुर्किये के दौरे के दौरान हागिया सोफिया गए थे। उन्होंने 2020 में कहा था कि उन्हें ”बहुत दुख” हुआ कि इसे फिर से मस्जिद बना दिया गया।

पोप ने की धर्म के नाम पर हिंसा की निंदा

पोप लिओ शुक्रवार को निकिया की पहली काउंसिल की 1,700वीं सालगिरह के जश्न में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने धर्म के नाम पर हिंसा की निंदा की और ईसाइयों से एकजुट होने का आग्रह किया। निकिया काउंसिल साल 325 में हुई बिशपों की एक सभा थी। यह सभा उस समय हुई जब पूर्वी और पश्चिमी चर्च एकजुट थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button