इंदौर: राहुल गांधी बगीचे में पीडि़त परिवारों से मिलेंगे…

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिवारों से मिलने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर आ रहे हैं। वे कुछ परिवारों से मिलने उनके घर जाएंगे,जबकि ज्यादातर परिवारों से वे उद्यान में मिलेंगे। राहुल अन्य परिवारों से भी घर पर मिलने जाना चाहते है, लेकिन बस्ती की गलियां इतनी संकरी हैं कि सुरक्षा एजेंसियां वहां राहुल गांधी के काफिले को ले जाने के पक्ष में नहीं हैं। संकरी गलियों में सुरक्षा देना कठिन होगा।सुरक्षा के प्रोटोकाल को निभाने में परेशानी आएगी।

उधर कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि अगर गाड़ियां अंदर नहीं जा पाईं तो राहुल गांधी पैदल ही बस्ती की गलियों में जाएंगे और पीडि़त परिवारों से मिलेंगे। उधर प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को पुलिस चौकी के पास वाले बगीचे में बुलाकर राहुल गांधी से मिलवाने की तैयारी है। राहुल ने खास तौर पर छह महीने के उस मासूम आव्यान के परिवार से मिलने की इच्छा जाहिर की है जिसकी मौत इस दूषित पानी की वजह से हुई थी।

वे सुबह 11 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल जाएंगे। अस्पताल में वे उन मरीजों का हाल जानेंगे जो अभी भी दूषित जल के संक्रमण से जूझ रहे हैं। इसके बाद उनका करीब एक घंटा भागीरथपुरा बस्ती में रुकेंगे और वहां से सीधे एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जाएंगे।

कमेटी सौंपेगी रिपोर्ट
भागीरथपुरा मामले में कांग्रेस ने एक कमेटी गठित की थी, जिसमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार, प्रताप ग्रेवाल सहित अन्य कांग्रेस नेता शामिल थे। जब कमेटी के सदस्य भागीरथ पुरा गए थे तो उन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं की विरोध का सामना भी करना पड़ा था। कमेटी ने जांच रिपोर्ट तैयार की है और वे आज इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सौंपेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बोले -भागीरथपुरा मामले की न्यायिक जांच होना चाहिए
भागीरथपुरा के मुद्दे पर कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर निशाना साध रही है। शनिवार को इंदौर में भागीरथपुरा के प्रभावितों से मिलने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी आएंगे। उससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपना एक बयान जारी किया है।

उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में जो 24 मौतें हुई है। उसे लेकर अभी तक सरकार ने किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की है। इस मामले में पब्लिक हियरिंग के साथ ही न्यायिक जांच होना चाहिए। इस मामले में अभी तक कर्मचारियों को निलंबित किया गया उनके तबादले हुए लेकिन देरी से निर्णय लेने वालों पर क्यों नहीं कार्रवाई हुई। अलग-अलग स्तर पर यह बात चलती है कि मुख्यमंत्री के अफसर को निर्देश है कि वह मेयर इंदौर के स्थानीय नेताओं की ज्यादा ना सुने उन्हें जो ठीक लगता है वह करें। मिरर पार्षद दवे स्वरों में यह बात बोलते हैं कि अफसर उनके सुनते नहीं है यह बात अफसर को मिले आदेश को बल देती है।

सिंह ने कहा कि यह बात भी सामने आई है की भागीरथपुरा मामले में साल भर पहले ही लाइनों के प्रस्ताव मंजूर हो गए थे,लेकिन निगम के जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों के अपने चेहते ठेकेदार है। इस कारण काम में देरी हुई। यह सब तब तक साबित नहीं होगा, जब तक मामले की न्यायिक जांच न हो। सरकार को जनसुनवाई कर सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि पता चल सके कि असली जिम्मेदार कौन है।

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