आडवाणी, जोशी लड़ सकते हैं राष्ट्रपति चुनाव, बाधा नहीं बनेगा कोर्ट का फैसला

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बुधवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर कोई असर नहीं पड़ेगा.दोनों नेता इस पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि चाहें तो वे चुनाव लड़ सकते हैं. आपराधिक साजिश का मुकदमा जरूर चलेगा लेकिन अभी कोर्ट ने उन्हें दोषी नहीं सिद्ध किया है.संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के मुताबिक जैसा लोग कह रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है. जब तक कोई दोषी साबित न हो जाए तब तक उसे अदालत निर्दोष मानती है. वह इनोसेंट माना जाता है. इसलिए इन दोनों नेताओं के किसी चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं लग सकती.सुप्रीम कोर्ट के वकील पद्मश्री ब्रह्मदत्त  का कहना है कि यदि किसी के खिलाफ कोई शिकायत है, एफआईआर है, केस चल रहा है तो यह उसे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए काफी नहीं है.मौजूदा समय में अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है. उसी स्थिति में रोक है, जब वह अदालत से दो वर्ष से ज्यादा की सजा के साथ दंडित हो जाए.जब केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली से यह सवाल पूछा गया कि क्‍या सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आडवाणी की राष्ट्रपति उम्मीदवारी पर असर पड़ेगा तो उन्‍होंने कहा कि, ‘ राष्‍ट्रपति  चुनावों को  लेकर बेवजह की अटकलबाजी  की  जा रही है.’मालूम हो कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जाएगा.बाबरी विध्वंस मामले में सभी 13 आरोपियों पर धारा 120 बी के तहत आपराधिक मामला चलाया जाएगा. साथ ही इस मामले की सुनवाई कर रहे जजों का ट्रांसफर तब तक नहीं होगा जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती.

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