आजादी की लड़ाई में अव्वल रहा कानपुर का तिलकहाल, पंडित नेहरू ने रखी थी नींव

कानपुर। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जनों की शान आन बान माने जानें वाले तिलकहाल से आजादी के लुई क्रांति की मिसाल जली थी। इसका निर्माण 1938 में किया गया था। जिसकी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी और इसका उदघाटन महात्मा गांधी ने किया था। इस ऐतिहासिक कार्यालय में आजादी के दीवाने सुभाष चन्द्र बोस से लेकर कई मूर्धन्य लोग पधारे। इंदिरा व राजीव सहित कई हस्तियों ने तिलकहाल शहर के कांग्रेस जनों की हौसला अफजाई की थी।

इस तिलकहाल को अब अपने नए राष्ट्रीय वध्यक्ष का बेसब्री से इंतजार है। पार्टी की कमजोरी के बाद भी बुजुर्ग कांग्रेसी यहां प्रतिदिन मन्दिर मानकर आते है और वर्तमान राजनीति की चर्चा कर पुराने दिनों को यादकर उसके किस्से नई पीढ़ी को सुनाते है। बुजुर्ग कांग्रेशियो के अनुसार अब केवल यादे ही रह गई है अब वो जुझरूपन भी कम दिखता है। तिलक जी नाम बनने वाले तिलकहाल की नींव पंडित जवाहरलाल नेहरु ने रखी थी जबकि महात्मा गांधी सात बार और सुभाषचंद्र बोस तीन बार यंहा आए थे। इनके अलावा विजय लक्ष्मी पंडित, कृष्णा मेनन, मोरार जी देसाई, जगजीवन राम, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी शीटर पचासो मूर्धन्य लोग यहां पधारे है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी को भी विद्वानों ने ही सुशोभित किया है।

चक से लेकर रोहतगी तक हुए अध्यक्ष

कानपुर महानगर के इस ऐतिहासिक तिलकहाल में पृथ्वीनाथ चक, प्रताप नारायण मिश्र, नरायन अरोड़ा, अर्जुन अरोड़ा, हमीद खां, रामवर्तन गुप्ता, शेल बिहारी, देवी सहाय बाजपेयी, जवाहरलाल रोहतगी, दादा नरेश चन्द्र चतुर्वेदी, प्रकाश जायसवाल, भूधर नारायण मिश्रा,अब्दुल मन्नान, महेश दीक्षित और हर प्रकाश अगिनहोत्री अध्यक्ष है। देवी सहाय तक चेयरमैन ओर जगदीश त्रिवेदी से अध्यक्ष पद नाम हुआ था।

स्वनामधन्य अध्यक्ष रहे शहर में

वयोवृद्ध कांग्रेसी शंकरदत्त मिश्र जी बताते है कि तिलक हाल व श्रद्धानन्द पार्क  आजादी के दीवानों की शरण स्थली रही है। गांधी जी 7 बार सुभाष बोस 3 बार आए। इंदिरा राजीव के अलावा देश की जानी हस्तियां यहां पधारी है।

गौरवान्वित है हम

जिस तिलकहाल की नींव विश्व के नामचीन ऐतिहासिक पुरषो ने की हो और जिसके अध्यक्ष की कुर्सी पर स्वनामधन्य लोग विराजे हो, उस कुर्सी पर वर्तमान समय हम बैठे है ये हमारे लुई गर्व की बात है। अब सोनिया गांधी जी फिर अध्यक्ष पद संभालेगी। हम सभी हर्षित है कि उनको भी तिलक हाल बुलाया जाय। कांग्रेसी अंग्रेजों से लड़ता रहावतो अब ये दमनकारी कांग्रेस जनों को हतोत्साहित नही कर पाएंगे।

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