अलवर के सरिस्का बाघ परियोजना में शनिवार को एक और बाघ की हो गई मौत

अलवर के सरिस्का बाघ परियोजना में शनिवार को एक और बाघ की मौत हो गई है। इस बाघ को ST-16 के नाम से जाना जाता था। बताया रहा है कि एसटी-16 बाघ की मृत्यु ओवरडोज ट्रैंक्यूलाइज से हुई है। वहीं सरिस्का प्रशासन का कहना बाघ की मौत हीट स्ट्रोक के कारण हुई है।  

मौत के बाद अब बाघ एसटी-16 का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि बाघ की मौत का असली कारण क्या है। हालांकि वन्यजीव वेशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में ट्रैंक्यूलाइज और ओवरडोज के कारण बाघ की मौत हुई है।

बाघ एसटी-16 के पांव में चोट लग गई थी, जिस वजह से वह कई दिनों से लंगडाकर चल रहा था। उसे 15 अप्रैल को सरिस्का के एनक्लोजर में छोड़ा गया था। इसके बाद 22 अप्रैल को उसे यहां से आजाद कर दिया गया। 28-29 मई को बाघ की साइटिंग के दौरान बाघ फिर लंगडाता दिखाई दिया और बाघ के पांव में गांठ (रसोली) भी दिखाई दी। डीएफओ सेढुराम यादव ने बताया कि इसके लिए उसे रोटक्याला में ट्रेंक्यूलाइज किया गया। इसके बाद उसे फिर पांव का इलाज कर रिवाइजल डोज दिया गया। जिसके कुछ देर बाद वह खड़ा होकर करीब एक-डेढ़ किलोमीटर चला और रोटक्याला में बैठ गया।

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