अर्थव्यवस्था को मिलेगी संजीवनी, RBI की पहल से मांग में बढ़ोतरी तय…

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की तरफ से पहली बार ब्याज दर कटौती की प्रचलित परंपरा तोड़ते हुए रेपो रेट को 0.35 फीसद नीचे लाने के फैसले को अर्थव्यवस्था के हालात में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्तीय क्षेत्र के जानकारों और उद्योग का मानना है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से न केवल अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने में मदद मिलेगी बल्कि घटती मांग में भी बदलाव आएगा।

हालांकि, उद्योगों का कहना है कि अब यह बैंकों के ऊपर है कि वे रेपो रेट में कमी का लाभ ग्राहकों और उद्योगों को दें ताकि कर्ज के प्रवाह में वृद्धि हो सके। अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति में जब अधिकांश क्षेत्रों में मांग कम हो रही है, रिजर्व बैंक की तरफ से बुधवार को उठाये गये कदम विकास की रफ्तार बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के चेयरमैन रजनीश कुमार का कहना है कि रिजर्व बैंक का यह अप्रत्याशित कदम इस बात को दर्शाता है कि मौद्रिक नीति बाजार को हैरान कर अच्छे नतीजे दे सकती है।
अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की दिशा में पिछले कुछ दिनों में रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति से लेकर विनियमन की दिशा में कई कदम उठाए हैं। यस बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री शुभदा राव मानती हैं कि रिजर्व बैंक के इस कदम ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में अर्थव्यवस्था की परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह के कदम दोहराए जा सकते हैं। कोटक महिंद्रा बैंक की प्रेसिडेंट कंज्यूमर बैंकिंग शांति एकंबरम ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने यह सुनिश्चित किया है कि विकास की रफ्तार बढ़ाने में मददकारी चौतरफा ढांचा तैयार हो।
एकंबरम का कहना है, ‘ऐसे वक्त में जब वैश्विक स्तर पर धीमी होती अर्थव्यवस्था से ट्रेड वार के खतरे बढ़ रहे हैं। घरेलू स्तर पर महंगाई की दर नीचे है। निर्यात और आयात दोनो में कमी आ रही है और शहरी व ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग घट रही है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति के जरिए अर्थव्यवस्था को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।’ जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने का रास्ता खुलेगा।
खासतौर पर हाउसिंग सेक्टर में 20 लाख रुपये तक का कर्ज देने का रास्ता साफ होगा। उधर इंडिया इंक का मानना है कि अब वक्त आ गया है जब बैंक कर्ज का प्रवाह बढ़ाने जैसे कदम उठाएं। फिक्की के प्रेसिडेंट संदीप सोमानी ने अपने एक बयान में कहा है, ‘जब तक ब्याज दर में कमी का यह सिलसिला बैंक आगे नहीं बढ़ाएंगे, हमें निवेश और खपत की स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं दिखेगा। इसलिए बैंकों को यह काम काफी तेज रफ्तार के साथ करना होगा।’
पीएचडी चैंबर के प्रेसिडेंट राजीव तलवार ने कहा कि उम्मीद है कि एमएसएमई क्षेत्र तक कर्ज का लाभ पहुंचाने की दिशा में रिजर्व बैंक रेपो दर को पांच फीसद के स्तर तक नीचे लाएगा। ‘लेकिन इस वक्त रेपो दर में कमी का लाभ जमीन तक पहुंचाने के लिए अब बैंकों की भूमिका अहम हो गई है।’ उधर इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा कि केंद्रीय बैंक यह भी सुनिश्चित करे कि निर्यातकों को कर्ज का प्रवाह बढ़े।





