अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में भारत शामिल

भारत ने अमेरिकी- नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल होकर वैश्विक सेमीकंडक्टर-एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई चेन की रणनीतिक दौड़ में नई दिशा दे दी है। ट्रंप प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य सिलिकॉन-आधारित तकनीकों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविधीकृत करना है। नई दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में औपचारिक रूप से इस साझेदारी का ऐलान कर दिया गया, जिससे अमेरिका को उन्नत चिप्स और एआई हार्डवेयर की वैश्विक पहुंच तय करने की प्रतिस्पर्धा में अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है।

पैक्स सिलिका ट्रंप प्रशासन की वह रणनीतिक पहल है, जिसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर सिलिकॉन-आधारित तकनीकों विशेषकर उन्नत सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवेयर की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाना है। अमेरिका का कहना है कि यह पहल किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी बढ़त और आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। अमेरिकी विदेश विभाग में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने सीएनबीसी से कहा, पैक्स सिलिका वास्तव में चीन के बारे में नहीं है, यह अमेरिका के बारे में है। अमेरिका भारत को एक ऐसे साझेदार के रूप में देखता है जो इन आपूर्ति श्रृंखलाओं को डी-रिस्क और विविधीकृत करने में मदद कर सकता है।

एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी मिलेगा समर्थन
भारत के शामिल होने से पैक्स सिलिका को न केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार मिलता है, बल्कि उभरते हुए सेमीकंडक्टर निर्माण और एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी समर्थन मिलता है। इससे सप्लाई चेन का विविधीकरण संभव हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत की भागीदारी से अमेरिका को एआई और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के नियम और पहुंच तय करने में अधिक प्रभाव मिलेगा।

भारत के ब्रिक्स सदस्य-बड़ा बाजार होने से अमेरिका को फायदा
भारत की भागीदारी को अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत माना जा रहा है। भारत न केवल दुनिया के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी बाजारों में से एक है, बल्कि वह ब्रिक्स समूह का भी सदस्य है। ऐसे समय में जब एआई हार्डवेयर और उन्नत चिप्स को लेकर विभिन्न भू-राजनीतिक गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, भारत का इस पहल में शामिल होना वैश्विक शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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