अब सेना आतंक का खात्मा होने तक नहीं रुकेगी सेना, कर सकती है ऐसा काम

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कल जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए 12 आतंकियों को ऊपर का रास्ता दिखा दिया। इस अभूतपूर्व सफलता के लिए सुरक्षा बलों को उन स्थानीय लोगों से जूझना पड़ा जो इस कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतर आए थे। पत्थरबाजों की भीड़ के लिए अब भी आतंकियों के लिए सहानुभूति कम नहीं हुई है। कल की मुठभेड़ में देखा गया कि लोग सेना की कार्रवाई से आतंकियों को बचाने के लिए उनकी ढाल बनने की कोशिश करते रहे।अब सेना आतंक का खात्मा होने तक नहीं रुकेगी सेना, कर सकती है ऐसा काम

जिस तरह से कल सेना ने जोरदार कार्रवाई को अंजाम दिया है, उसे देखते हुए अब घाटी में असंतोष और बढ़ने वाला है। कल मुठभेड़ के समय द्रगड़, कचदूरा और सुगान गांवों में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव कर उनका रास्ता रोका। ये आतंकी समर्थक प्रदर्शनकारी किसी भी तरह सेना को मुठभेड़ वाली जगह पर पहुँचने नहीं देना चाहते थे। हालांकि सेना को फ्री हैंड दिए जाने के बाद स्थिति बदल चुकी है। सुरक्षा बलों ने किसी भी तरह का रहम न दिखाते हुए विरोध कर रहे लोगों को अच्छा सबक सिखाया है। इनको रोकने के लिए सेना ने बेहिचक पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में स्थानीय लोग सेना पर पत्थरबाजी और भीड़ के रूप में सुरक्षाकर्मियों का रास्ता रोककर आतंकियों की मदद करने लगे हैं। साल 2017 में भी भीड़ ने कई सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। 2016 में हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कि भीड़ ने दक्षिणी कश्मीर में स्थित बीएसएफ कैंप को अपना निशाना बना लिया था। करीब 500 लोगों ने पथराव किया और सुरक्षा कर्मियों पर हमला करने की कोशिश की थी।

ये तय है कि बारह आतंकियों की मौत के बाद स्थानीय समर्थक और उग्र हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ये बात अच्छी तरह से जानती है कि इस मामले में आतंकी और उनके स्थानीय समर्थक घाटी में बवाल करने का प्रयास करेंगे लेकिन सेना अब कमर कस चुकी है। स्पष्ट नज़र आ रहा है कि सरकार कई दशकों से चली आ रही इस राष्ट्रीय समस्या को जड़ से ख़त्म करने का मन बना चुकी है।

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