अगर कम लगा रहे हैं सनस्क्रीन, तो SPF 50 भी नहीं देगा सुरक्षा

त्वचा को सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन सबसे अहम और शक्तिशाली हथियार है। हम सभी जानते हैं कि सनस्क्रीन लगाना चाहिए, लेकिन अक्सर लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि मात्रा में सनस्क्रीन लगाना।
दरअसल, अगर आप सनस्क्रीन का सही मात्रा में इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो बोतल पर लिखा SPF आपको वह सुरक्षा नहीं दे पाएगा जिसका उसने वादा किया है। इसलिए आइए जानते हैं कि सही सुरक्षा के लिए आपको कितना सनस्क्रीन लगाना चाहिए और इसे लगाने का सही तरीका क्या है।
सनस्क्रीन की सही मात्रा
डर्माटोलॉजिस्ट गुरवीन वरैच ने सनस्क्रीन की सही मात्रा मापने के लिए एक बहुत ही आसान तरीका बताया है, जिसे टू-फिंगर रूल कहा जाता है।
कैसे करें इस्तेमाल- अपनी इंडेक्स फिंगर और मिडल फिंगर की पूरी लंबाई पर सनस्क्रीन की दो लाइनें खींचें।
कैसे लगाएं- यह मात्रा आपके चेहरे के लिए काफी मानी जाती है। गर्दन पर भी लगाने के लिए तीन उंगली सनस्क्रीन लें। इससे आपका चेहरा और गर्दन दोनों कवर हो जाएंगे। हालांकि, अक्सर लोग अपने चेहरे पर सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन गर्दन को भूल जाते हैं। इसलिए एजिंग के लक्षण गर्दन पर सबसे पहले नजर आते हैं।
पूरे शरीर के लिए कितनी मात्रा?
अगर आप बीच पर हैं या धूप में बाहर जा रहे हैं और शरीर के अन्य हिस्सों को भी कवर करना चाहते हैं, तो पूरे शरीर के लिए लगभग 30 मिलीलीटर सनस्क्रीन की जरूरत होती है। इसमें हाथ, पैर और पीठ जैसे खुले हिस्से शामिल हैं।
क्यों जरूरी है सही मात्रा में लगाना?
सनस्क्रीन का परीक्षण लैब में त्वचा के प्रति वर्ग मिलीग्राम की मात्रा के साथ किया जाता है। इसलिए अगर आप SPF 50 वाला सनस्क्रीन बहुत कम मात्रा में लगाते हैं, तो आपको असल में केवल SPF 15 या 20 जितनी ही सुरक्षा मिल पाती है। इससे सनबर्न, समय से पहले बुढ़ापा और स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
सनस्क्रीन लगाने के खास नियम
केवल सही मात्रा ही नहीं, बल्कि इसे लगाने का तरीका और समय भी मायने रखता है, जैसे-
20 मिनट पहले लगाएं- सनस्क्रीन को त्वचा में सोखने और सुरक्षा कवच बनाने में समय लगता है। इसलिए घर से निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले इसे लगाएं।
री-एप्लीकेशन- सनस्क्रीन की परत पसीने, रगड़ या धूप के कारण समय के साथ कम होने लगती है। हर दो घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है।
हर मौसम में जरूरी- बादल वाले दिनों में भी 80% तक UV किरणें त्वचा तक पहुंच सकती हैं। इसलिए चाहे सर्दी हो या बारिश, सनस्क्रीन कभी न छोड़ें।
एक्सपायरी डेट जांचें- पुराना सनस्क्रीन अपना प्रभाव खो देता है। हमेशा अच्छी क्वालिटी वाला प्रोडक्ट चुनें।





