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बड़ी घटना: पंचकूला की कैथ लैब में छह माह में 24 मौतों से हिली सरकार

चंडीगढ़। हरियाणा के चार जिलों पंचकूला, गुरुग्राम, फरीदाबाद व अंबाला में स्थापित कैथ लैब में एक के बाद एक हो रही मौतों पर मरीजों के तीमारदारों में हड़कंप की स्थिति है। राजधानी चंडीगढ़ से सटे पंचकूला में बनी कैथ लैब में ट्रायल के दौरान छह माह के अंतराल में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। फरीदाबाद में कैथ लैब की लांचिग के दो माह के अंदर ही छह मरीजों की मौत होने की खबर है। गुरुग्राम में कैथ लैब पिछले माह ही शुरू हुई।बड़ी घटना: पंचकूला की कैथ लैब में छह माह में 24 मौतों से हिली सरकार

गुरुग्राम, फरीदाबाद व अंबाला की कैथ लैब में हुई मौतों की रिपोर्ट भी तलब

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने पंचकूला समेत सभी चारों कैथ लैब में अब तक हुई मौत तथा उनके कारणों की पूरी रिपोर्ट तलब की है। सबसे भयावह स्थिति पंचकूला कैथ लैब में बनी, जहां 24 लोग मर चुके हैैं। 3 नवंबर 2017 से इस कैथ लैब में ट्रायल शुरू हुआ था। पंचकूला अस्पताल की ओर से कराए गए आडिट में कैथ लैब में 24 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है।

विपक्ष का दबाव बढ़ता देख स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही सोमवार को विज ने कहा कि मारे गए 24 लोगों में से 10-11 की मृत्यु कैथ लैब में इलाज की प्रक्रिया शुरू होने से पहले हो चुकी थी। कई मरीजों को देरी से भी लाए जाने की सूचना मिली है। फिर भी पूरी रिपोर्ट हासिल करने के लिए जांच कमेटी गठित कर दी गई है।

केरल के मेडिट्रिन अस्पताल के सहयोग से पीपीपी आधार पर चल रही लैब

पंचकूला के जिस अस्पताल में कैथ लैब में 24 लोगों की मौत हो चुकी है, वह नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्यूएसी) प्राप्त करने वाला देश का पहला अस्पताल बताया जाता है। अंबाला छावनी, फरीदाबाद और गुरुग्राम के बाद पंचकूला ऐसा चौथा सरकारी अस्पताल है, जहां सरकार ने केरल आधारित मेडिट्रिन अस्पताल के सहयोग से पीपीपी आधार पर कैथ लैब स्थापित की हैं। इन लैब में सरकार भवन, बिजली और जलापूर्ति मुहैया करा रही है, जबकि मेडिट्रिन अस्पताल उपकरण, मशीनरी, डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नियुक्त करता है।

आयुर्वेद की डिग्रियों वाले डाक्टरों की कैथ लैब में तैनाती

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कैथ लैब के आइसीयू में ऐसे डाॅक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, जिनके पास आयुर्वेद की डिग्रियां हैैं। ऐसे डाॅक्टर आइसीयू में हृदय रोग संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नियुक्त नहीं किए जा सकते। अस्पताल में कैथ लैब ऐसी स्वास्थ्य सुविधा है जहां टेस्ट और अन्य प्रक्रिया एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाने की प्रक्रिया अनुभवी डाॅक्टर पूरा करते हैैं।

डाॅ. राजीव वढेरा करेंगे पंचकूला में हुई 24 मौतों की जांच

जानकारी के अनुसार, सिविल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसलटेंट डाॅ. राजीव वढ़ेरा आडिट टीम का नेतृत्व करेंगे। टीम में चार डाॅक्टर शामिल हैं। डाॅ. वढेरा ने इस बात की पुष्टि की कि 3 नवंबर के बाद कैथ लैब में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 24 मौतों में नौ एंजियोप्लास्टी के बाद हुई। 12 लोगों की मौत हृदयरोग संबंधी प्रक्रिया शुरू होने से पहले हुई। बाकी के मरीजों की मौत पेसमेकर लगाने और अन्य कारणों से हुई। अवधि में डाक्टरों ने कैथ लैब की ओपीडी में तीन हजार मरीजों की जांच की। इनमें से 661 की एंजियोग्राफी की गई और 331 की एंजियोप्लास्टी हुई।

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