कर्नाटक: येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ, लापता हुए कांग्रेस के 4 विधायक हो रहा विरोध प्रदर्शन

भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। अब उन्हें कर्नाटक विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय मिला है।

येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण से जहां भाजपा खेमे में खुशी की लहर है, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यही नहीं, अब तक रिसोर्ट में रखे गए कांग्रेस और जेडीएस विधायक भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठा नेता गुलामनबी आजाद, अशोक गलहोत भी शामिल हैं।

येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विट किया कि कर्नाटक में भाजपा के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है, फिर भी वह सरकार बनाने की कोशिश कर रहे है। यह संविधान का मजाक है। आज सुबह भाजपा चाहे जश्न मना ले, लेकिन देश संविधान की हार का शौक मनाएगा।

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इस बीच, कांग्रेस के चार विधायक लापता बताए जा रहे हैं। टीवी चैलनों के मुताबिक, ये विधायक बैठक में नहीं पहुंचे थे और रिसोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि मैंगलुरू से गुरुवार को विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक खाडेर का कहना है कि सभी विधायक साथ हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने कहा है कि मामला कोर्ट में लंबित है। हम जनता के बीच जाएंगे और बताएंगे कि किस तरह भाजपा असंवैधानिक काम कर रही है।

वहीं भाजपा नेता अनंत कुमार का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन करना है तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी और सिद्धारमैया के खिलाफ करना चाहिए, जिनके कारण कांग्रेस हारी है।

इससे पहले कर्नाटक में राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया तो कांग्रेस भड़क गई और उसने जेडीएस के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बुधवार देर रात करीब 1.30 बजे सुनवाई शुरू हुई और सुबह 4.30 बजे तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया।

सर्वोच्च अदालत ने भाजपा के सीएम प्रत्याशी बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। हालांकि गुरुवार दोपहर दो बजे तक विधायकों की लिस्ट जरूर मांगी है। अगली सुनवाई शुक्रवार सुबह होगी।

गौरतलब है कि विधानसभा की कुल 224 में से 222 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78, सहयोगी बसपा के साथ जदएस को 38 और अन्य को दो सीटें मिली हैं। ऐसे में बहुमत के लिए जरूरी 112 के आंकड़े के सबसे करीब भाजपा ही रही।

 

 

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