हरियाणा में कर्मचारियों को वापस करनी होगी दस माह की अंतरिम राहत

चंडीगढ़। पहली जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ लेने वाले सरकारी कर्मचारियों को दस महीने की अंतरिम राहत वापस करनी होगी। सरकार द्वारा एरियर की राशि से 20 हजार रुपये समायोजित करने के फैसले पर हाई कोर्ट की मुहर के बाद वित्त विभाग ने सभी महकमों को निर्देश जारी कर दिया है। आदेश को दो महीने में लागू कर रिपोर्ट सरकार को भेजनी होगी।हरियाणा में कर्मचारियों को वापस करनी होगी दस माह की अंतरिम राहत

कर्मचारी संगठनों के दबाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने चुनाव से पहले तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पहली दिसंबर 2014 से दो हजार रुपये महीने की अंतरिम राहत दिए जाने का फैसला लिया था। हालांकि वित्त विभाग ने तभी साफ कर दिया था कि सातवां वेतन आयोग लागू करते ही इस अंतरिम राहत को समाप्त कर दिया जाएगा।

अक्टूबर 2016 में वर्तमान मनोहर सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को पहली जनवरी 2016 से लागू करते हुए एरियर देने की घोषणा कर दी। साथ ही निर्देश दिया कि पहली जनवरी से अक्टूबर 2016 तक कर्मचारियों को अंतरिम राहत के रूप में दिया गया पैसा इस एरियर में से काट लिया जाएगा।

फैसले का कर्मचारी संगठनों ने विरोध कर दिया। काफी संख्या में कर्मचारी ऐसे थे जिन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ लेने में नुकसान हो रहा था। ऐसे में सरकार ने इन कर्मचारियों को विकल्प दिया कि अगर वे चाहें तो पहली जुलाई 2016 से सातवें वेतन आयोग का लाभ ले सकते हैं। मगर जो कर्मचारी पहली जनवरी से सिफारिशें लागू कराता है उसे अंतरिम राहत के रूप में दिए गए 20 हजार रुपये वापस देने ही होंगे। इसके बाद सरकार द्वारा कर्मचारियों के एरियर से अंतरिम राहत की राशि काट ली गई।

कई कर्मचारी इसके विरोध में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट चले गए थे। वहां सरकार ने तर्क रखा कि अंतरिम राहत न तो वेतन है और न ही भत्ता। सर्विस रूल की धारा 14 और 22 के अनुसार अंतरिम राहत में दी गई राशि को सरकार एरियर में एडजस्ट कर सकती है और इसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। चूंकि यह रिकवरी न होकर सिर्फ एडजस्टमेंट है, इसलिए कर्मचारियों को अलग से नोटिस देने की जरूरत नहीं।

पिछले दिनों हाई कोर्ट ने रमेश कुमार बनाम अन्य के मामले में फैसला सरकार के पक्ष में सुनाया था। इसके बाद वित्त विभाग के विशेष सचिव ने सभी विभागों के प्रधान सचिव, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त, बोर्ड-निगमों के रजिस्ट्रार और उपायुक्तों को लिखित आदेश जारी किया है कि अंतरिम राहत में दिए गए 20 हजार रुपये को कर्मचारियों के एरियर में एडजस्ट कर दिया जाए।

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