जब जय प्रकाश नारायण की जगह पहली बार जालंधर आए थे अटल जी

- in पंजाब

जालंधर : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गत देर शाम निधन हो गया। वाजपेयी का देश के साथ-साथ जालंधर से गहरा रिश्ता है और अक्सर वह जालंधर आते रहते थे। 1978 में चुनावी माहौल था और जालंधर स्थित बल्र्टन पार्क में जनता पार्टी की रैली रखी गई थी। रैली को संबोधन करने के लिए लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने आना था लेकिन अचानक स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने की वजह से वह नहीं आ पाए। तब उनकी जगह अटल बिहारी वाजपेयी जालंधर आए। अटल जी का यह पहला आगमन था जालंधर में। तब अटल जी जनता पार्टी में थे। उसके बाद वह कई बार भारतीय जनता पार्टी को संगठित करने के उद्देश्य से जालंधर आते रहे। 

जेल ने सिखाया एकता का पाठ
अटल जी के जालंधर आगमन बारे बात सांझी करते हुए भाजपा नेता नवल कंबोज ने बताया कि तब वाजपेयी ने अपने भाषण में कहा था कि प्रजा सभापति, भाइयो और बहनो, आज हम और आपके बीच लोक नायक जय प्रकाश जी को आना था। अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल दाखिल होना पड़ा। उन्होंने कहा कि जय प्रकाश जी का कोई स्थान ले इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। साथ ही उन्होंने जय प्रकाश नारायण की तुलना भीष्म पितामाह से भी की। इस दौरान अपने भाषण में वाजपेयी ने कहा कि यह बात ठीक है कि हमें एक होने की अकल देर से आई वह भी जेल में आई। इस बात की इंदिरा गांधी को बधाई। कंस रूपी राक्षस को मारने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ था और इंदिरा रूपी कांग्रेसी राक्षस को खत्म करने के लिए जनता पार्टी का जन्म भी जेल में हुआ है।

हिंदुस्तान का तेजस्वी बेटा चला गया
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड़ ने कहा कि अटल जी का कोई सानी नहीं था और न ही उनके मुकाबले का कोई दूसरा प्रधानमंत्री हुआ है जो सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो। उन्होंने कहा कि वह हमेशा सभी को साथ लेकर चलते थे और एकता के सांझी थे। अटल जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बराड़ ने कहा कि आज हिंदुस्तान का तेजस्वी बेटा हमेशा के लिए चला गया। उनकी कमी दुनिया में कभी पूरी हो सकती।   

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

पाक के भारत विरोधी प्रचार को रोकेगा ‘देश पंजाब’ FM रेडियो चैनल

अमृतसर। पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रचार का जवाब