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एक बार फिर सिद्धू ने कहा- काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का…

चंडीगढ़। अपने जमाने के धुआंधर क्रिकेटर और प्रजा के स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को तनाव मुक्‍त थे और यही कारण हे कि बहुत दिन वह पूरे फार्म में नजर अाए। अरसे बाद फिर सिद्धूवाणी गूंजी। सुप्रीम कोर्ट से रोड रेज मामले में गैरइरादतन हत्‍या के आरोप से बरी हाेने के बाद सिद्धू ने परमात्‍मा का शुक्रिया अदा किया। इसके साथ ही बोले- ‘ अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का…।’एक बार फिर सिद्धू ने कहा- काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का...

रोडरेज मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सिद्धू ने पत्रकारों से खुल कर बात की। उन्‍होंने कहा, यह सच है कि बहुत से लोग खासकर नेता चाहते थे कि उनके खिलाफ फैसला आए, लेकिन पंजाब सहित देश से विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों अमेरिका, कनाडा, पाकिस्तान सहित तमाम देशों में लोगों ने उनके लिए दुआएं भी की थीं। उन्होंने कहा कि वह अपना विरोध करने वाले वालों व साथ देने वालों का धन्यवाद करते हैं।

बोले, वह केवल एक्‍सीडेंट था

पीडि़त परिवार के लिए पूछे जाने पर सिद्धू ने काफी देर सोचने के बाद कहा कि वह एक एक्सीडेंट था। अभी इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।

फैसला आने का बाद लगा बधाइयों का तांता

परिजनों ने बताया कि फैसला आने से एक रात पहले सिद्धू ढाई घंटे का ध्यान लगाने के बाद रात को आठ बजे सो गए थे और सुबह सात बजे सोकर उठे। उन्होंने सोकर उठने के बाद अपने कुत्तों के साथ करीब आधा घंटे बिताया। इसके बाद अपने करीबियों से बातचीत की। इसके बाद सिद्धू नार्मल रहे। जब अदालत का फैसला आया तो सिद्धू की पत्नी ने नवजोत कौर ने सबसे पहले बधाई दी। इसके बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस के राष्‍ट्रीय प्रधान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी व पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़, राणा गुरजीत सिंह सोढी, तृप्त बाजवा, सुख सरकारिया और स्‍थानीय निकाय विभाग के तमाम अधिकारियों ने सिद्धू को बधाई दी।

बुधवार को मिलेंगे राहुल गांधी और प्रियंका से, गुरुघर में होंगे नतमस्‍तक

नवजोत सिंह सिद्धू फैसला आने के तीन घंटे बाद सुनील जाखड़ के साथ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलने पहुंचे। उसके बाद शाम को वह नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां राहुल गांधी व प्रियंका वाड्रा से मुलाकात करने के बाद सिद्धू बुधवार को अमृतसर लौटकर गुरु के घर में माथा टेकेंगे।

विवादों से रहा है पुराना नाता

1. नवजोत सिद्धू खुद कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता व मां से काफी कुछ सीखा है और सात साल की उम्र से ही तमाम बार उन्हें अग्निपरीक्षा देकर पास होना पड़ा है। हर बार भगवान ने उन्हें भरोसा व लड़ने की शक्ति दी और अपने भक्त का बेड़ा पार लगाया। भारतीय क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे के समय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के साथ हुए विवाद के बाद सिद्धू इंग्लैंड का दौरा बीच में ही छोड़कर चले आए थे। इसके बाद उन्हें कहा गया कि अब उनकी भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी मुश्किल है, लेकिन भगवान पर भरोसे के चलते उनकी दोबारा टीम में वापसी हुई।

2.1988 में पटियाला में कार पार्किंग को लेकर सिद्धू का विवाद हुआ और हाथापाई भी हुई। इसके बाद 65 साल के गुरनाम सिंह की अस्‍पताल में मौत हो गई। इसके बाद से 30 सालों तक निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक सिद्धू खुद को बेकसूर साबित करने के लिए लड़ते रहे। मंगलवार को आखिरकार सिद्धू को इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने बरी करके बड़ी राहत दी।

3. पटियाला छोड़ने के बाद जब सिद्धू को अमृतसर से टिकट मिली तो बाहरी उम्मीदवार कहकर उन्हें हराने की कोशिश की गई, लेकिन उन्‍होंने अमृतसर के लोगों के साथ वायदा किया कि वह अमृतसर छोड़कर नहीं जाएंगे। कहते हैं आज तक वायदे को निभा रहा हूं और आगे भी निभाउंगा।

4. भाजपा के लिए अकाली दल के संबंधों को लेकर सिद्धू का विवाद रहा। सिद्धू इस बात पर अड़े रहे कि पंजाब में भाजपा तस्करों व डाकुओं की पार्टी के साथ क्यों गठबंधन बनाए हुए है। सिद्धू का तर्क था कि अकाली दल के तमाम नेताओं के संरक्षण में नशा व पंजाब को लूटा जा रहा है। भाजपा ने सिद्धू को राज्यसभा सदस्य का आॅफर दिया, लेकिन सिद्धू ने मना कर दिया और भाजपा छोड़ दी।

5. भाजपा छोड़ने के बाद सिद्धू के साथ आम आदमी पार्टी के संपर्क हुआ। अरविंद केजरीवाल ने बातचीत लगभग फाइनल होने के बाद यह कहकर सिद्धू को पार्टी में शामिल करने का फैसला वापस ले लिया कि सिद्धू दागी नेता हैं। इसके बाद सिद्धू ने केजरीवाल पर हमला बोला और आरोप लगाए कि केजरीवाल बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और हैं। वह पंजाब में राजनीति करने नहीं बल्कि पंजाब को लूटने की नीयत से यहां आ रहे हैं।

6. इसके बाद अकाली दल का साथ छोड़कर आए परगट सिंह के साथ सिद्धू ने राहुल गांधी से मुलाकात की और कांग्रेस ज्वाइन की। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू का विरोध किया। अंत में राहुल के दबाव में कैप्‍टन माने और सिद्धू को कांग्रेस में ज्वाइन करवाया गया। चर्चा रही कि कांग्रेस के विधानसभा चुनाव में जीतने पर उन्‍हें उपमुख्‍यमंत्री पद दिया जाएगा। लेकिन, चुनाव के बाद कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने से इन्‍कार कर दिया।

7. सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री बनने के बाद शहरी निकाय के साथ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग की भी मांग की, लेकिन कैप्टन ने ठुकरा दी।

8. मंत्री बनने के बाद सिद्धू ने जालंधर, अणृतसर व लुधियाना नगर निगमों में पिछली सरकार के कार्यकाल में तैनात रहे तीन आइएएस अफसरों को खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कारवाई की सिफारिश की। कैप्टन ने सिफारिश नहीं मानी।

9. केबिल, माफिया, नशा माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया के मुद्दे को लेकर सिद्धू ने हर मौके पर अकाली दल व सुखबीर बादल तथा बिक्रम सिंह मजीठिया को घेरने की कोशिश की, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह हर बार सिद्धू  को बैकफुट पर ढकेलते रहे। विवाद आज तक जारी है।

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