इस योजना से अब भारी बारिश के होते हुए भी नहीं होगा मिंटो ब्रिज के पास जलभराव

नई दिल्ली। मिंटो ब्रिज के पास जलभराव की समस्या से अब निजात मिलने की उम्मीद जग गई है, क्योंकि एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोप के बाद दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) व लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने काम करना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को पीडब्ल्यूडी की मशीनरी जहां सीवेज से गाद निकालती हुई नजर आई, वहीं दिल्ली जल बोर्ड ने भाजपा मुख्यालय के सामने बंद पड़ी लाइन को खोल दिया। हालांकि अभी इसके मरम्मत का कार्य चल रहा है।इस योजना से अब भारी बारिश के होते हुए भी नहीं होगा मिंटो ब्रिज के पास जलभराव

डीजेबी के अनुसार दो तीन दिन में अगर भारी बरसात नहीं हुई तो अब मिंटो ब्रिज के नीच वर्षा की वजह से जलभराव नहीं होगा। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक कर नई दिल्ली के उपायुक्त (राजस्व) की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी है। इसमें नगर निगम, डीजेबी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को काम करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि सुरक्षा कारणों की वजह से भाजपा के मुख्यालय के सामने से गुजर रही 2400 एमएम की सीवेज लाइन को बंद कर दिया था, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश में मिंटो रोड ओवरब्रिज में दो बार बस डूब गई थी।

पंपिंग स्टेशन पर मौजूद रहेगा पीडब्ल्यूडी का स्टाफ

मिंटो ब्रिज के नीचे जलभराव न हो इसके लिए पीडब्ल्यूडी मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर नजर रखेगा। अगर बरसात दिन में या देर शाम तक होगी तो पंपिंग स्टेशन पर स्टाफ मुस्तैद रहेगा। जलभराव वाले अंडरपास या ओवरब्रिज पर लगे पंपिंग स्टेशन को शुरू कर दिया जाएगा।

पहले विभाग कर लेते समन्वय तो नहीं होती दिल्ली की किरकिरी

डीजेबी व पीडब्ल्यूडी मिंटो ब्रिज के नीचे जलभराव पर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते रहे, लेकिन हाई कोर्ट की लताड़ के बाद दोनों ही विभाग सक्रिय हो गए हैं। दो दिन से जल बोर्ड भाजपा मुख्यालय के पास बंद पड़ी सीवेज लाइन को खोलकर उसकी मरम्मत कर रहा है। साथ ही नालों से गाद हटाने का काम हो रहा है।

सीवेज लाइन को पीछे से मोड़ने की योजना बना रहा है जल बोर्ड

दिल्ली जल बोर्ड और लोक निर्माण दोनों विभाग आपस में मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान करने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों विभागों में इस सीवेज लाइन को भाजपा मुख्यालय के पीछे या फिर मुख्यालय के बाहर से दूसरी तरफ की रोड को खोदकर बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने बुधवार को दोनों विभागों को भी मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने के आदेश दिए थे। जो भी पीडब्ल्यूडी का काम होगा किया जाएगा। मिंटो ब्रिज के पास जलभराव के लिए दूसरे विभागों के साथ समन्वय करके काम किया जा रहा है।

आरके अग्रवाल, प्रमुख अभियंता, पीडब्ल्यूडी आप सरकार की लापरवाही से हुआ जलभराव

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के महापौर नरेंद्र चावला ने इसके लिए आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की निष्क्रियता के कारण दिल्ली का हाल बेहाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिसोदिया की अध्यक्षता में 25 जून को बाढ़ नियंत्रण विषय पर हुई बैठक के 27 जून को जारी मिनट्स से यह स्पष्ट होता है कि पीडब्लूडी विभाग 25 जून तक गाद निकालने का केवल 60 प्रतिशत काम ही पूरा कर सका।

कई जगहों पर नाले व सीवर हैं ध्वस्त

पिछले दिनों बारिश में मिंटो रोड पर जलभराव की घटना ने दिल्ली में बरसाती पानी की निकासी व ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी है। असल में यहां बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। यदि आइआइटी दिल्ली द्वारा तैयार ड्रेनेज मास्टर प्लान और उसके सुझावों पर अमल किया जाता तो शहर में जलभराव की स्थिति नहीं होती। पर आइआइटी के सुझावों को लेकर सरकारी महकमा गंभीर नहीं है।

आइआइटी ने बकायदा अध्ययन कर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया था। जिसमें यह बात कही गई है कि कई जगहों पर सीवर का पानी बरसाती नालों में व नालों का पानी सीवर लाइन में गिरता है। यह दोनों ही परिस्थितियों में जल व सीवर निकासी के लिए उचित नहीं है।

बड़े नालों का अंतिम सिरा छोटे नालों से जुड़ा है

आइआइटी के अध्ययन में कहा गया है कि कई जगहों पर अधिक क्षमता वाले बड़े नालों का अंतिम सिरा छोटे नालों से जुड़ा है। जो जल जमाव का सबसे बड़ा कारण है। उदाहरण के तौर पर आया नगर में बड़े नाले का पानी कम क्षमता वाले छोटे नाले में गिरता है। इस वजह से बारिश अधिक होने पर छोटे नालों का पानी ओवरफ्लो होकर बाहर आने लगता है। मिंटो रोड के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। 2400 एमएम के ड्रेनेज को बंद कर जल निकासी छोटे नाले से शुरू कर दी गई। इसके अलावा यह भी पाया गया कि कई जगहों पर नालों में पानी के बहाव की दिशा प्राकृतिक ढलान के विपरीत है।

नालों की डिजाइन में भी खामी है। इसके अलावा अतिक्रमण भी बड़ी समस्या है। इसके मद्देनजर आइआइटी ने सरकार को सुझाव दिया था कि बरसाती नालों को महत्वपूर्ण सरकारी संपत्ति समझा जाना चाहिए। उस पर किसी भी सूरत में अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

कई नालों को पूरी तरह या कुछ हद तक ढक दिया गया है। ऐसे नालों की सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है। बरसात का पानी निकालने के लिए सीवर का मेनहोल खोलकर पानी निकालने पर प्रतिबंध जरूरी है। इसके अलावा आइआइटी ने नालों में निर्माण को भी जल निकासी में बड़ा अवरोध बताया है। कई जगहों पर नालों में फ्लाईओवर के पिलरों का निर्माण किया गया है। इस कारण थोड़ी सी भी बारिश होती है तो जलभराव के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। साथ जाम के कारण लोग परेशान होते हैं।

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