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गंगा में कम हुआ पानी का स्तर, उभरे बालू के टीले

वाराणसी : काशी की जान गंगा व इसके घाट हैं। घाटों की शान गंगा से है। इसको देखने के लिए देश-विदेश से रोज हजारों पर्यटक यहां आते हैं। आस्था की प्रतीक गंगा की इठलाती लहरें जब अपने घाटों को छूती हैं तो ऐसा लगता है कि मानो हृदय के तार बज उठे हों। यह दीगर बात है कि इन दिनों गंगा में लहरें नहीं होने के कारण नौका विहार के वास्तविक आनंद से पर्यटक वंचित रह जाते हैं।गंगा में कम हुआ पानी का स्तर, उभरे बालू के टीले

कई माह से पानी की कमी के चलते गंगा का घाटों को छोड़ना जारी है। वहीं पर्यटक भी इस बदहाली से उदास नजर आते हैं। पिछले दिनों गंगा के पानी का काला होना, अचानक उसमें मछलियों का मरना व बीच धारा में उभरे बालू के टीले शुभ संकेत नहीं हैं। ये हालात सावधान होने के लिए सचेत कर रहे हैं। आलम तो इतना खतरनाक हो चुका है कि लोग गंगा के पेटा में बाइक लेकर पहुंच जा रहे हैं। इन विपरीत परिस्थितियों चलते ही जलचर भी पलायन को विवश हैं।

जानकार बताते हैं कि कानपुर से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम करने से स्थिति और भयावह हो गई है। पहले भी जितना पानी छोड़ा जाता था वह अपर्याप्त ही था। पहले कानपुर से 2200 क्यूसेक पानी गंगा के लिए छोड़ा जाता था जिसे घटाकर अब 1400 क्यूसेक कर दिया गया है। यह मात्रा कम कर देने के कारण स्थिति और भयावह हो गई है। गंगा में अधिक पानी छोड़ने के लिए जिलाधिकारी ने पत्र लिखा लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। बताते हैं कि कानपुर पानी तब ही छोड़ पाएगा जब उसके पास पानी होगा।

जलस्तर में लगातार गिरावट

गंगा का जलस्तर लगातार गिरता ही जा रहा है। गर्मी के मौसम में गंगा के जलस्तर के घटने और बढ़ने का व्यवहार पहली नजर आ रहा है। बीस अप्रैल को गंगा का जलस्तर 58.07 मीटर था जो 31 मई को गिरकर 57.76 मीटर हो गया।

बोले पर्यटक : नहीं आता अब मजा

गर्मी के अवकाश में सपरिवार काशी घूमने आए पश्चिम बंगाल के पर्यटक विकास कुमार मुखर्जी ने कहा कि तीन साल बाद मैं यहां आया लेकिन नौका विहार करने में मजा नहीं आया। अब गंगा में फ्लो नहीं रह गया। हर तरफ रेता उभर रहा है। पुणे से सपरिवार आए दिनेश कस्तूरे ने निराशा जताते हुए कहा कि जलस्तर की कमी और बदबू से घूमने का मजा खराब हो गया।

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