विजेंद्र गुप्ता ने कहा-डोर स्टेप डिलीवरी से पूंजीपति को फायदा दे रही AAP सरकार

- in दिल्ली, राज्य

दिल्ली सरकार इन दिनों अपनी डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम को लेकर काफी चर्चा में है. लेकिन विपक्ष के मुताबिक, केजरीवाल सरकार इस स्कीम के जरिए पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है.

 विजेंद्र गुप्ता ने कहा-डोर स्टेप डिलीवरी से पूंजीपति को फायदा दे रही AAP सरकारराशन की डोर स्टेप डिलीवरी पर बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस योजना का ऐसे समय में लाया जाना दिल्ली के गरीब नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित करना है. जब भारत सरकार ने दिल्ली सरकार को सीधे ही लाभार्थियों के खाते में पैसा जमा कराने की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना की पेशकश की है. राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन से राशन व्यवस्था में सुधारों से कार्ड धारकों को काफी सुविधा होने लगी है.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय नीति के अन्तर्गत ई-पोज सफलतापूर्वक लागू कर चुकी है. मंत्री महोदय ने स्वयं कार्ड धारकों की राह आसान करते हुए यह निर्देश दिए थे कि जिन कार्ड धारकों के अंगूठे अथवा अंगुलियों के निशान मशीन द्वारा दर्ज नहीं हो रहे हैं. उनका नाम नोट करके राशन दे दिया जाए ताकि किसी को निशान न मिलने के कारण राशन से वंचित नहीं होना पड़े.

उन्होंने कहा कि सरकार ने दुकानदारों का कमीशन 70 रुपये क्विंटल से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया है. राशन की दुकान की पोर्टेबिलिटी के माध्यम से राशन दुकानदारों की मोनोपॉली खत्म की जा चुकी है. 20 प्रतिशत कार्ड धारक इस योजना का लाभ उठा चुके हैं. इसके अतिरिक्त 65 वर्ष के अधिक के कार्ड धारकों और दिव्यांगों को घर पर ही राशन पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने के आदेश किए गए थे. डोर स्टेप डिलीवरी पर सरकार के अपने विभागों के अनुसार 250 करोड़ रुपये प्रति महीने अतिरिक्त खर्चा होने का अनुमान है. यह बोझ दिल्ली के राजस्व पर पड़ेगा.

पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिशउन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डोरस्टेप डिलीवरी के माध्यम से पूंजीपतियों के हवाले करने पर तुली हुई है. उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत दिल्ली सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े बड़े- बड़े राशन माफियाओं को लाभान्वित करने का प्रयास है. विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से प्रत्येक परिवार को हर महीने पांच किलोग्राम अतिरिक्त आटे की प्राप्ति हो सकती है. इससे सरकार को 250 करोड़ की बचत होगी.

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